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बस स्टैंड पर सजेगा भक्ति का महाकुंभ, 19 अप्रैल से 21 कुण्डीय श्रीराम महायज्ञ और प्राण-प्रतिष्ठा महोत्सव

सीहोर। शहर के न्यू बस स्टैंड स्थित श्री हनुमान मंदिर समिति एवं समस्त क्षेत्रवासियों के तत्वाधान में आगामी 19 अप्रैल से एक भव्य धार्मिक उत्सव का आगाज होने जा रहा है। इस दौरान 21 कुण्डीय श्रीराम महायज्ञ, प्रतिमा प्राण-प्रतिष्ठा, सप्त दिवसीय श्रीराम कथा और मानस सम्मेलन जैसे कई आध्यात्मिक आयोजन होंगे। मंदिर निर्माण और आयोजन की भव्यता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि करीब 5 करोड़ रुपये की लागत से सिद्ध हनुमान मंदिर को नया स्वरूप दिया गया है।
सोमवार को यज्ञ संचालक श्रीश्री 1008 पंडित दुर्गाप्रसाद कटारे, मंदिर समिति अध्यक्ष रुद्रप्रकाश कटारे और संस्कार मंच के संयोजक मनोज दीक्षित ने आयोजन स्थल का जायजा लिया। महोत्सव के लिए विशाल यज्ञशाला का निर्माण लगभग पूरा हो चुका है। वहीं हजारों श्रद्धालुओं ने स्वेच्छा से गेहूं, दाल, घी, तेल, शक्कर और चावल जैसी सामग्री भंडार गृह में दान की है। प्रतिदिन होने वाले नगर भोज के लिए नगद राशि का दान भी लगातार मिल रहा है।
राजस्थान के संगमरमर से महकेंगे गर्भगृह
यज्ञ संचालक संत कटारे बाबा ने बताया कि बस स्टैंड पर स्थित श्री सिद्ध हनुमान मंदिर अब करोड़ों की लागत से एक भव्य तीर्थ का रूप ले चुका है। यहां राजस्थान से विशेष रूप से मंगवाई गई भगवान हनुमान, प्रभु श्रीराम, लक्ष्मण और माता जानकी की प्रतिमाओं की प्राण प्रतिष्ठा की जाएगी। इस अवसर पर देशभर से प्रख्यात संत और विद्वान सीहोर की धरा पर पधारेंगे।
5 मंजिला यज्ञशाला
इस महोत्सव का मुख्य आकर्षण 5 मंजिला यज्ञशाला है, जिसकी ऊंचाई लगभग 55 फीट है। बांस, लिप्टिस, कुश और नारियल की रस्सियों से निर्मित यह भव्य संरचना श्रद्धालुओं को अपनी ओर आकर्षित कर रही है। पंडित दुर्गाप्रसाद कटारे ने बताया कि उनके परिवार की परंपरा मंदिरों के जीर्णोद्धार की रही है। उनके ब्रह्मलीन पिता ने 232 मंदिरों का जीर्णोद्धार किया था, जबकि वे स्वयं अब तक 88 मंदिरों का कार्य पूर्ण कर चुके हैं और 12 अन्य पर काम जारी है।
21 कुण्डों में 84 यजमान देंगे आहुतियां
यज्ञाचार्य पंडित दीपक शास्त्री के मार्गदर्शन में 84 से अधिक यजमान 21 कुण्डों में विश्व शांति और जनकल्याण के लिए आहुतियां देंगे। आयोजन के दौरान महाकाल मंडल द्वारा रामलीला की प्रस्तुति भी दी जाएगी।
सात दिवसीय उत्सव का कार्यक्रम
19 अप्रैल: भव्य कलश यात्रा, पंचांग पूजन और मानस सम्मेलन का शुभारंभ।
20 अप्रैल: देव स्थापना, अग्नि स्थापना और हवन।
21 अप्रैल: देव पूजन, पुष्पाधिवास और विभिन्न धार्मिक अनुष्ठान।
22 अप्रैल: हवन एवं मिष्ठानाधिवास।
23 अप्रैल: महाभिषेक और भव्य शोभायात्रा।
24 अप्रैल: मूर्तियों की प्राण-प्रतिष्ठा और भव्य महाआरती।
25 अप्रैल: पूर्णाहुति और विशाल भंडारा।

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