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रेहटी पुलिस के हत्थे चढ़े दिल्ली, छत्तीसगढ़ और नागपुर के शातिर ठग

सीहोर। क्षेत्र के किसानों और व्यापारियों के साथ धोखाधड़ी करने वाले एक बड़े अंतर्राज्यीय गिरोह को पकडऩे में रेहटी पुलिस ने बड़ी सफलता हासिल की है। यह गिरोह फर्जी जीएसटी दस्तावेजों के आधार पर कृषि उपज की खरीदी करता था और भुगतान किए बिना ही रफूचक्कर हो जाता था। पुलिस ने इस मामले में दिल्ली, छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र से जुड़े तीन शातिर ठगों को गिरफ्तार किया है।
पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार रेहटी निवासी फरियादी पंकज चंद्रवंशी ने थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि कुछ व्यक्तियों ने खुद को बड़ा व्यापारी बताकर उनसे संपर्क किया। आरोपियों ने विश्वास में लेकर लगभग 6500 क्विंटल मक्का की फसल खरीदी। इसके बदले में उन्होंने फर्जी जीएसटी दस्तावेज दिखाए और बिना भुगतान किए ही गायब हो गए। ठगी का अहसास होने पर पीडि़त ने पुलिस की शरण ली। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस अधीक्षक दीपक कुमार शुक्ला और अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक सुनीता रावत के निर्देशन में एसडीओपी बुदनी रवि शर्मा और रेहटी थाना प्रभारी राजेश कहारे के नेतृत्व में एक विशेष टीम गठित की गई।
तकनीकी साक्ष्यों से दबोचे गए आरोपी
पुलिस टीम ने मुखबिर तंत्र और तकनीकी साक्ष्यों मोबाइल लोकेशन व अन्य की मदद से जाल बिछाया और गिरोह के तीन मुख्य सदस्यों को गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तार आरोपियों में शामिल हैं, जिनमें विनोद कुमार कलवानी 45 वर्ष निवासी रायपुर छत्तीसगढ़। मनोज कुमार 47 वर्ष निवासी शाहदरा दिल्ली और राजेश चवारे 34 वर्ष निवासी नागपुर शामिल हैं।
धोखाधड़ी का स्मार्ट तरीका
पूछताछ में खुलासा हुआ कि यह गिरोह बेहद शातिर तरीके से काम करता था। आरोपी अलग-अलग राज्यों के मोबाइल नंबरों का इस्तेमाल करते थे और खुद को ब्रोकर बताते थे। शुरुआत में वे व्यापारियों से कम मात्रा में माल खरीदते थे और समय पर भुगतान कर उनका भरोसा जीत लेते थे। जैसे ही व्यापारी उन पर भरोसा करने लगताए वे बड़ी मात्रा में माल मंगवा लेते और फिर अपने मोबाइल फोन बंद कर फरार हो जाते थे।
आधा दर्जन राज्यों में फैला है नेटवर्क
पकड़े गए आरोपियों का आपराधिक रिकॉर्ड काफी लंबा है। इनके खिलाफ उत्तर प्रदेश, हरियाणा, महाराष्ट्र, राजस्थान और दिल्ली जैसे राज्यों में भी धोखाधड़ी के मामले दर्ज हैं। कई जगहों पर इनके खिलाफ चेक बाउंस के मामले में कोर्ट से वारंट भी जारी हो चुके हैं। फिलहाल पुलिस गिरोह के अन्य फरार सदस्यों की तलाश कर रही है।
पुलिस टीम को मिली सराहना
इस अंधे कत्ल जैसी गुत्थी को सुलझाने और अंतर्राज्यीय गिरोह को बेनकाब करने में निरीक्षक राजेश कहारे, उपनिरीक्षक सुशील पाण्डेय, प्रधान आरक्षक महेन्द्र सिंह, आरक्षक योगेश कटारे और विकास नागर की मुख्य भूमिका रही।

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