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खेती का सीजन, डीजल और नगद राशि की किल्लत, दवाई-सामान की कीमतें भी बढ़ीं

- किसान संगठन ने सौंपा ज्ञापन, कांग्रेस ने भी साधा निशाना, भारी परेशानियों में अन्नदाता

सुमित शर्मा
किसानों की आमदनी दोगुनी करने, उनकी खुशहाली को लेकर भले ही तमाम दावे, वादे किए जा रहे हों, लेकिन जमीनी हकीकत इससे एकदम अलग है। सरकारों के तमाम दावों के बाद भी सबसे ज्यादा परेशानियों में किसान ही है। उनकी परेशानियां आने वाले समय में और भी ज्यादा बढ़ती हुई दिखाई दे रही है, क्योंकि एक तरफ खेती का सीजन आने वाला है। किसानों को मूंग की फसल काटकर आगामी फसलों की तैयारियां करनी हैं, लेकिन इस समय उन्हें पेट्रोल पंपों पर डीजल नहीं मिल रहा है, फसल बेची तो बैंकों से नगद राशि भी नहीं मिल रही। उपर से फसलों में डालने वाली दवाई सहित अन्य सामान के दामों में भी बढ़ोतरी हो गई। ऐसे में किसान अपनी पीढ़ा किसको सुनाए। किसानों की पीढ़ा को लेकर किसान स्वराज संगठन लगातार धरना-प्रदर्शन करके ज्ञापन सौंप रहा है तो वहीं कांग्रेस ने भी सरकार को आड़े हाथों लिया है। कांग्रेस नेता विक्रम मस्ताल शर्मा ने केंद्रीय कृषि मंत्री पर भी तंज कसा है।
मुख्यमंत्री व जिला प्रशासन के नाम सौंपा ज्ञापन-
किसान स्वराज संगठन ने जिले के किसानों की विभिन्न ज्वलंत समस्याओं और मांगों को लेकर शासन-प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोल रखा है। संगठन के पदाधिकारियों ने मुख्यमंत्री और जिला प्रशासन के नाम ज्ञापन सौंपकर चेतावनी दी है कि यदि किसानों की मांगों का तत्काल निराकरण नहीं किया गया तो संगठन उग्र आंदोलन और प्रदर्शन करने के लिए मजबूर होगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी। किसान स्वराज संगठन के जिला अध्यक्ष भगवानसिंह यदुवंशी के नेतृत्व में मुख्यमंत्री के नाम एक विस्तृत ज्ञापन सौंपा गया। इस ज्ञापन में किसानों की मुख्य मांगें उठाई गई हैं, जिसमें वर्ष 2025 के खरीफ सीजन में सरकार द्वारा धान खरीदी की गई थी। घोषणा के अनुसार किसानों को 200 प्रति क्विंटल की बोनस राशि मिलनी थी, जो आज तक उनके खातों में नहीं पहुंची है। इसे तुरंत जारी किया जाए। मूंग की खरीदी, गिरदावरी, पंजीयन और खरीदी केंद्रों की तत्काल घोषणा कर व्यवस्थाएं दुरुस्त की जाएं। गेहूं तुलाई, स्लॉट बुकिंग, तारीख निकलने की समस्या, बिल जनरेशन और भुगतान में आ रही दिक्कतों को तुरंत दूर किया जाए। वर्तमान में सोयाबीन बीज उत्पादक कंपनियां बीज को मध्यप्रदेश के बाहर भेज रही हैं, जिससे स्थानीय स्तर पर बीज के दाम आसमान छू रहे हैं। इस निर्यात पर तुरंत रोक लगाई जाए। गोपालपुर नर्मदा सिंचाई पाइपलाइन योजना को तत्काल चालू किया जाए, भूमि अधिग्रहण में संपत्तियों का मूल्यांकन चार गुना किया जाए और प्रदेश के सभी किसानों को कर्ज मुक्त किया जाए। इसके साथ ही हर स्तर पर किसान मंच का गठन हो।
कांग्रेस नेता विक्रम मस्ताल शर्मा ने साधा निशाना-
किसानों की समस्याओं को लेकर कांग्रेस नेता विक्रम मस्ताल शर्मा ने भी सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा है कि केंद्रीय कृषि मंत्री के गृह जिले और बुधनी विधानसभा में ही यदि लगभग 10 हजार किसान गेहूं तुलाई से वंचित रह जाएं, तो सोचिए पूरे मध्यप्रदेश और भारतवर्ष में किसानों की क्या स्थिति होगी? आज मध्यप्रदेश का किसान चारों तरफ से परेशान और प्रताड़ित है। एक तरफ स्लॉट बुकिंग की समस्याएं, दूसरी तरफ फसलों की तुलाई में देरी, ऊपर से सोसायटी के ब्याज का बोझ, बिजली के भारी-भरकम बिल और मूंग खरीदी में मात्र 25 प्रतिशत तुलाई जैसी नीतियां किसानों की कमर तोड़ रही हैं। उन्होंने कहा कि मैं व्यक्तिगत एवं कांग्रेस पार्टी की ओर से इस किसान विरोधी व्यवस्था का पुरजोर विरोध करता हूं। दुख की बात यह है कि केंद्रीय कृषि मंत्री जी किसानों की समस्याओं पर ध्यान देने के बजाय “मामा की क्लास” और “मामा की कोचिंग” चलाने में व्यस्त दिखाई दे रहे हैं, जबकि किसान अपने खून-पसीने की कमाई को बचाने के लिए दर-दर भटक रहा है। आज व्यापारी, किसानों की मजबूरी का फायदा उठाकर उनकी फसल औने-पौने दामों में खरीदने की तैयारी में हैं। अगर समय रहते स्लॉट नहीं खोले गए तो हजारों किसान लूटे जाएंगे और बरबाद हो जाएंगे। मैं मुख्यमंत्री और कृषि मंत्री से निवेदन करता हूं कि तत्काल कम से कम 2 दिन के लिए पुनः स्लॉट खोले जाएं। शेष किसानों की तुलाई सुनिश्चित की जाए। सोसायटी ब्याज पर तत्काल राहत दी जाए। किसानों पर बढ़ते बिजली बिलों और खरीदी संकट पर गंभीर निर्णय लिए जाएं।

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