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ग्रामीणों ने रात 1 बजे सडक़ पर पटाखे फोडक़र निकाला ‘कैंडल मार्च’

सीहोर। जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में पिछले एक सप्ताह से जारी अघोषित बिजली कटौती ने ग्रामीणों के सब्र का बांध तोड़ दिया है। भीषण गर्मी और 44 डिग्री के टॉर्चर के बीच रात-रात भर गुल रहने वाली बिजली के खिलाफ आधी रात को ग्रामीणों का अनोखा और उग्र आक्रोश देखने को मिला। ग्राम चंदेरी के किसान और समाजसेवी एमएस मेवाड़ा के नेतृत्व में सैकड़ों ग्रामीणों ने रात ठीक 1.00 बजे सीहोर-बिलकिसगंज-भोपाल मुख्य मार्ग पर उतरकर मोमबत्तियां जलाईं, बम-पटाखे फोड़े और मोबाइल की रोशनी में कैंडल मार्च निकालकर विद्युत मंडल के खिलाफ जमकर हुंकार भरी।
समाजसेवी एमएस मेवाड़ा और प्रदर्शनकारी ग्रामीणों ने विद्युत मंडल पर भेदभाव का आरोप लगाते हुए कहा कि इस भीषण गर्मी में ग्रामीण क्षेत्रों का जनजीवन पूरी तरह पटरी से उतर गया है। रात के समय दो से तीन घंटे तक लगातार दो-तीन बार अघोषित कटौती की जा रही है। 44 डिग्री तापमान और उमस के कारण बच्चों, बुजुर्गों और महिलाओं का रात में सोना दूभर हो गया है। बिजली न रहने से गांवों में मच्छरों का प्रकोप बढ़ गया है, जिससे मलेरिया और डेंगू जैसी बीमारियों का खतरा मंडराने लगा है। इतना ही नहीं, बिजली गुल रहने से सुबह के समय पेयजल का संकट भी गहरा गया है।
फैक्ट्रियों की बिजली काटें, गांवों की नहीं
रात 1 बजे सडक़ जाम जैसी स्थिति के बीच ग्रामीणों ने मशाल और मोमबत्तियां थामकर बिजली कंपनी के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। ग्रामीणों का कहना था कि शहरों में तो 24 घंटे निर्बाध बिजली दी जा रही है, जबकि गांवों को रातभर अंधेरे में धकेल दिया जाता है। ग्रामीणों ने मांग रखी कि यदि प्रदेश में वाकई बिजली का कोई संकट है तो सरकार बड़े औद्योगिक क्षेत्रों और फैक्ट्रियों की बिजली कटौती करे, लेकिन गांवों के गरीब किसानों और आम जनता की बिजली बंद न की जाए। रात की कटौती ने हमारा जीना मुश्किल कर दिया है।
उग्र आंदोलन की चेतावनी
ग्रामीणों ने इस गंभीर समस्या को लेकर मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री और ऊर्जा मंत्री से सीधे दखल देने की गुहार लगाई है। उन्होंने मांग की है कि विद्युत विभाग के लापरवाह अधिकारियों को सख्त निर्देश देकर ग्रामीण इलाकों में रात की अघोषित कटौती को तत्काल बंद कराया जाए। ग्रामीणों ने भावुक और कड़े लहजे में कहा कि वे सरकार के समर्थक और सेवक हैं, इसलिए उनके दर्द और समस्याओं को गंभीरता से सुना जाना चाहिए। उन्होंने प्रशासन को दो टूक चेतावनी दी कि यदि जल्द ही बिजली आपूर्ति सुचारु नहीं की गई तो आगामी दिनों में यह आंदोलन और अधिक उग्र रूप अख्तियार करेगा।

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