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हादसे से भी सबब नहीं: सलकनपुर में रात 9 बजे के बाद गुल हो जाती है बिजली, अंधेरे में आते हैं लोग

- पिछले दिनों तेंदुए ने किया था एक बुजुर्ग श्रद्धालु पर हमला, अंधेरे में डूबा रहता है सड़क मार्ग

सीहोर। लाखों-करोड़ों लोगों की आस्था का केंद्र देवीलोक सलकनपुर रात 9 बजे के बाद अंधेरे में डूब जाता है। सड़क मार्ग एवं सीढ़ी मार्ग की बिजली रात 9 बजे ऑटोमेटिक बंद हो जाती है, जबकि सड़क मार्ग पर पिछले दिनों एक हादसा भी हुआ था, जिसमें एक बुजुर्ग श्रद्धालु पर तेंदुए ने हमला कर दिया था। इसके बाद उनकी मौत हो गई थी। इस हादसे के बाद भी सलकनपुर मंदिर समिति ने कोई सबब नहीं लिया और उसी ढर्रे पर व्यवस्थाएं संचालित हो रही हैं, जो पहले हो रही थी। अब समिति की कार्यप्रणाली पर भी सवालिया निशान उठने लगे हैं। मनमानी और हठधर्मिता से कार्य कर रही मंदिर समिति के बदलाव के सुर भी सुनाई दे रहे हैं।
सीहोर जिले के प्रसिद्ध तीर्थ धाम देवीलोक सलकनपुर में प्रतिवर्ष करोड़ों लोग दर्शन के लिए पहुंचते हैं। सलकनपुर को भव्य एवं दिव्य बनाने के लिए केंद्रीय कृषि मंत्री एवं मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने भी करीब 200 करोड़ से ज्यादा की सौगात दी थी, लेकिन जिस तरह से देवीलोक का कार्य हुआ उससे साबित होता है कि इस राशि में देवीलोक में तो काम कम हुआ, जिम्मेदारों में बंदरबांट ज्यादा हुई है। देवीलोक में दर्शन के लिए हरदिन लोग पहुंचते हैं, लेकिन यहां की व्यवस्थाएं एवं सुविधाएं ऐसी हैं कि लोगों को मिल ही नहीं पा रही है। रात 9 बजे के बाद सलकनपुर सड़क मार्ग, सीढ़ी मार्ग पूरी तरह अंधेरे में डूब जाता है।
8 बजे मंदिर के बंद होते हैं पट, 9 बजे के बाद भी आते हैं लोग-

यूं तो मां विजयासन मंदिर में आरती का समय 7.30 बजे का है। इसके बाद रात 8 बजे तक मातारानी के पट भी बंद हो जाते हैं। स्थानीय नागरिकों सहित बाहर से आने वाले श्रद्धालु शाम की आरती में शामिल होते हैं। कई लोग एवं दुकानदार रात 9 बजे के बाद नीचे आते हैं। ऐसे में उन्हें सड़क मार्ग से अंधेरे में ही लौटना पड़ता है। उनकी गाड़ी की लाइटों में वे नीचे आते हैं, लेकिन सड़क मार्ग पर जलने वाली सभी लाइटें बंद हो जाती है। कई श्रद्धालु रात में ही सलकनपुर पहुंच जाते हैं, जो सुबह-सुबह जल्दी दर्शन के लिए उपर जाते हैं। उन्हें भी अंधेरे में ही जाना पड़ता है, जिससे उनकी जान भी जोखिम में रहती है। इसके बाद भी मंदिर प्रशासन द्वारा रात 9 बजे लाइटें बंद कर दी जाती है।
सड़क मार्ग के द्वार भी नहीं होते बंद-
सलकनपुर में जहां देखो वहीं पर लापरवाही ही लापरवाही दिखाई देती है। एक तरफ रात 9 बजे सड़क मार्ग की बिजली बंद कर दी जाती है, लेकिन जाने के लिए जो गेट बनाए गए हैं वे खुले ही रहते हैं। सड़क मार्ग पर जो द्वार बनाए गए हैं उनमें कोई गेट भी नहीं लगे हैं। वहां कोई चौकीदार एवं गार्ड भी नहीं रहता। ऐसे में यदि कोई अनजान श्रद्धालु यहां आए और वह सीधे उपर जाए तो उन्हें रात में कोई रोकने वाला भी नहीं है।

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