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इंटरनेट पर सुरक्षित रहने के लिए प्राइवेसी सेटिंग्स रखें मजबूत: एसपी सक्सेना

सीहोर। जिला पुलिस द्वारा महिलाओं और युवाओं की डिजिटल सुरक्षा के लिए चलाए जा रहे सेफ क्लिक 2.0 अभियान के तहत सेंट मेरी स्कूल में विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुईं पुलिस अधीक्षक सोनाक्षी सक्सेना ने बच्चों को सोशल मीडिया के सुरक्षित उपयोग की सीख दी। उन्होंने कहा कि इस अभियान का मुख्य उद्देश्य युवाओं को इतना सशक्त और जागरूक बनाना है ताकि कोई भी उनके निजी डेटा या तस्वीरों का दुरुपयोग न कर सके।
कार्यक्रम में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक सुनीता रावत, एसडीओपी पूजा शर्मा, सूबेदार बृजमोहन धाकड़, साइबर सेल प्रभारी सुशील साल्वे सहित स्कूल प्रबंधन, शिक्षक और भारी संख्या में छात्र-छात्राएं मौजूद रहे।
लापरवाही पड़ सकती है भारी
छात्र-छात्राओं को संबोधित करते हुए पुलिस अधीक्षक सोनाक्षी सक्सेना ने वर्तमान दौर में डिजिटल सुरक्षा की आवश्यकता पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि आज के डिजिटल युग में इंटरनेट और सोशल मीडिया हमारे जीवन का अहम हिस्सा बन चुके हैं, लेकिन थोड़ी सी लापरवाही भी हमें साइबर अपराधियों का शिकार बना सकती है। सेफ क्लिक अभियान का मुख्य उद्देश्य आप सभी को जागरूक और सशक्त बनाना है ताकि कोई भी आपके वीडियो, फोटो या निजी डेटा का दुरुपयोग न कर सके।
अनजान लोगों से साझा न करें जानकारी
इस दौरान बताया गया कि अपनी निजी तस्वीरें, वीडियो क्लिप्स और संवेदनशील जानकारियां कभी भी अनजान लोगों के साथ साझा न करें। अपने सभी सोशल मीडिया अकाउंट्स पर प्राइवेसी सेटिंग्स को मजबूत रखें और टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन को हमेशा ऑन रखें। यदि कोई आपको किसी वीडियो क्लिप या फोटो के जरिए डराने या ब्लैकमेल करने की कोशिश करता है तो डरें नहीं, तुरंत अपने माता-पिता, संबंधित थाना या साइबर सेल से संपर्क करें।
हेल्पलाइन नंबर 1930 की दी जानकारी
कार्यक्रम के दौरान अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक सुनीता रावत, एसडीओपी पूजा शर्मा और साइबर विशेषज्ञों ने छात्र-छात्राओं को साइबर सुरक्षा के प्रैक्टिकल टिप्स दिए। विद्यार्थियों को बताया गया कि किसी भी प्रकार के ऑनलाइन उत्पीडऩ या साइबर फ्रॉड की स्थिति में तुरंत राष्ट्रीय साइबर अपराध हेल्पलाइन नंबर 1930 पर कॉल करें या एनसीआरपी पोर्टल और स्थानीय थाने में शिकायत दर्ज कराएं। पुलिस अधिकारियों ने भरोसा दिलाया कि शिकायत करने वाले पीडि़त की पहचान पूरी तरह गोपनीय रखी जाती है।

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