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‘सेफ क्लिक 2.0’, दर्शन एकेडमी में छात्र-छात्राओं को सिखाए साइबर सुरक्षा के गुर

सीहोर। आज के डिजिटल युग में मोबाइल और इंटरनेट जितना उपयोगी है, लापरवाही बरतने पर यह उतना ही खतरनाक भी साबित हो सकता है। इसी को ध्यान में रखते हुए पुलिस मुख्यालय के निर्देश पर चलाए जा रहे सेफ क्लिक 2.0 अभियान के तहत शुक्रवार को स्थानीय दर्शन एकेडमी स्कूल में एक दिवसीय साइबर सुरक्षा जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। जिला पुलिस द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य स्कूली बच्चों को इंटरनेट के सुरक्षित उपयोग और ऑनलाइन ठगी से बचाना था।
कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित एसडीओपी पूजा शर्मा और साइबर सेल प्रभारी सुशील साल्वे ने छात्र-छात्राओं को साइबर स्पेस (इंटरनेट की दुनिया) के सुरक्षित और जिम्मेदार उपयोग के बारे में विस्तार से समझाया। अधिकारियों ने विद्यार्थियों को बताया कि सोशल मीडिया पर किसी भी अनजान व्यक्ति से दोस्ती न करें और न ही अपनी निजी तस्वीरें या जानकारी साझा करें। मोबाइल का इस्तेमाल सिर्फ पढ़ाई और ज्ञान बढ़ाने जैसी सकारात्मक चीजों के लिए ही किया जाना चाहिए।
फर्जी लिंक और ऑनलाइन फ्रॉड से रहें सावधान
साइबर विशेषज्ञों ने बच्चों को वर्तमान में चल रहे ऑनलाइन फ्रॉड के तरीकों के बारे में सचेत किया। उन्होंने कहा कि मोबाइल पर आने वाले किसी भी लॉटरी, इनाम या मुफ्त ऑफर वाले फर्जी लिंक पर भूलकर भी क्लिक न करें। अपने बैंक खाते, एटीएम का पिन, ओटीपी या कोई भी व्यक्तिगत जानकारी किसी भी अनजान व्यक्ति को फोन पर न बताएं। यदि कभी कोई संदिग्ध ऑनलाइन गतिविधि या ब्लैकमेलिंग का मामला सामने आए तो डरने के बजाय तुरंत अपने माता-पिता, शिक्षकों या पुलिस को सूचित करें।
साइबर क्राइम होने पर 1930 पर करें तुरंत कॉल
साइबर सेल प्रभारी ने बच्चों को बताया कि यदि किसी के साथ किसी भी प्रकार की ऑनलाइन धोखाधड़ी या साइबर अपराध हो जाता है तो घबराने की जरूरत नहीं है। ऐसी स्थिति में समय गंवाए बिना तत्काल राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर कॉल करना चाहिए या सरकार के आधिकारिक साइबर क्राइम पोर्टल पर अपनी शिकायत दर्ज करानी चाहिए। तुरंत सूचना देने पर डूबा हुआ पैसा वापस मिलने की संभावना बढ़ जाती है।
विद्यार्थियों ने उत्साह से पूछे सवाल, पुलिस ने दूर की शंकाएं
जागरूकता सत्र के दौरान स्कूल के छात्र-छात्राओं ने भी बढ़-चढक़र हिस्सा लिया। बच्चों ने ऑनलाइन गेमिंग फ्रॉड, सोशल मीडिया अकाउंट हैकिंग और फेक कॉल से जुड़े कई मजेदार व जरूरी सवाल विशेषज्ञों से पूछे। पुलिस अधिकारियों ने बेहद सरल और व्यावहारिक उदाहरण देकर बच्चों की सभी शंकाओं का समाधान किया।

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