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मानसून ने पकड़ी रफ्तार, नदी-नाले उफान पर, भैंरुंदा और इछावर में सबसे ज्यादा बरसे बदरा

सीहोर। जिले में आखिरकार मानसून पूरी तरह सक्रिय हो गया है। झमाझम बारिश के दौर से जहां एक तरफ नदी-नाले उफान पर आ गए हैं, वहीं दूसरी तरफ भीषण गर्मी से परेशान आम जनता को राहत मिली है और किसानों के चेहरों पर खुशी लौट आई है। भू अभिलेख विभाग द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार 1 जून से अब तक जिले में कुल 4.70 इंच औसत वर्षा दर्ज की जा चुकी है।
मौसम विभाग के अनुसार जिले में आमतौर पर मानसून 15 से 20 जून के बीच दस्तक देता है, जो कि अब पूरी तरह स्थापित हो चुका है। बीते 24 घंटों में जिले में औसतन 0.30 इंच बारिश दर्ज की गई। हालांकिए पिछले साल इसी अवधि तक जिला 6.27 इंच औसत बारिश देख चुका था, लेकिन जानकारों का कहना है कि आने वाले दिनों में यह कमी जल्द ही पूरी हो जाएगी।
बारिश के मामले में भैरुंदा अव्वल
जिले में क्षेत्रवार बारिश की स्थिति देखें तो इस मानसून सीजन में अब तक भैंरुंदा और इछावर इलाकों में सबसे अधिक वर्षा दर्ज की गई है। भैंरुंदा में 1 जून से अब तक 7.51 इंच बारिश हुई है, जिसमें से पिछले 24 घंटों में 0.66 इंच पानी गिरा। इछावर क्षेत्र में कुल 6.69 इंच वर्षा दर्ज की गई है, जिसमें से बीते 24 घंटों में 0.86 इंच झमाझम बारिश हुई। जिले के अन्य प्रमुख केंद्रों में बुदनी में अब तक 5.78 इंच और सीहोर शहर में 5.14 इंच वर्षा दर्ज की गई है। हालांकि इन दोनों केंद्रों पर पिछले 24 घंटों में कोई बारिश नहीं हुई। जावर में पिछले 24 घंटों में 0.62 इंच बारिश दर्ज की गई, जिससे यहां कुल वर्षा 3.82 इंच तक पहुंच गई है। आष्टा में बीते 24 घंटों में 0.19 इंच बारिश के साथ कुल 3.54 इंच पानी बरस चुका है। रेहटी में पिछले 24 घंटे सूखे रहे, लेकिन सीजन की कुल बारिश 3.13 इंच दर्ज की गई है। श्यामापुर में पिछले 24 घंटों में केवल 0.05 इंच हल्की बूंदाबांदी हुई, जिससे यहां कुल आंकड़ा 2.39 इंच तक पहुंचा है।
2-3 दिनों में तेज बारिश का अलर्ट
मौसम विभाग के अनुसार जिले की सामान्य वार्षिक वर्षा 45.21 इंच है। वर्तमान में अरब सागर और बंगाल की खाड़ी से लगातार आ रही नम हवाओं के कारण मजबूत सिस्टम बन रहा है। मौसम वैज्ञानिक एसएस तोमर का कहना है कि अगले दो से तीन दिनों के भीतर पूरे जिले में तेज बारिश का नया दौर शुरू होने की पूरी उम्मीद है। इस बारिश के बाद खेतों में पर्याप्त नमी आ जाएगी, जिससे खरीफ की फसलों सोयाबीन, मक्का आदि की बोनी का काम तेजी पकड़ सकेगा।

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