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नाबालिग से घर में खींचकर दुष्कर्म करने वाले आरोपी तुलसीराम को आजीवन कारावास की सजा

सीहोर। नाबालिग बच्ची को जबरदस्ती घर में खींचकर ले जाने और उसके साथ बर्बरतापूर्वक दुष्कर्म करने के मामले में अदालत ने बड़ा फैसला सुनाया है। सीहोर के विशेष न्यायालय पॉक्सो एक्ट की न्यायाधीश स्मिता सिंह ठाकुर ने दरिंदगी के आरोपी तुलसीराम कुशवाहा को दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास और 4700 रुपये के अर्थदंड की सजा से दंडित किया है।
अभियोजन के अनुसार यह घटना 26 जुलाई 2024 की है। पीडि़ता की मां ने थाना कोतवाली में रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि घटना वाले दिन शाम को जब वह काम से घर लौटी तो उसकी नाबालिग बेटी ने रोते हुए अपनी आपबीती सुनाई। पीडि़ता ने बताया था कि दोपहर करीब 4.00 बजे जब वह घर के पास बने शौचालय गई थी, तभी पड़ोस में रहने वाला आरोपी तुलसीराम कुशवाहा वहां आया। उसने पीडि़ता का मुंह दबाया और उसे जबरन खींचकर अपने घर के भीतर ले गया। आरोपी ने अंदर से दरवाजा बंद कर कुंडी लगा दी। इसके बाद दरिंदे ने पीडि़ता के पैर रस्सी से बांध दिए और उसके साथ जबरदस्ती बलात्कार किया।
बुआ ने मौके पर पहुंचकर बचाई जान
पीडि़ता ने खुद को बचाने के लिए संघर्ष किया, आरोपी को लात मारी और शोर मचाया। पीडि़ता की चीख सुनकर उसकी बुआ तुरंत वहां पहुंच गईं, जिन्होंने पीडि़ता को आरोपी के चंगुल से छुड़ाया। खुद को घिरा देख आरोपी तुलसीराम वहां से भागने लगा। भागते समय उसने पीडि़ता को जातिसूचक शब्द कहे और जान से मारने की धमकी देते हुए कहा आज तो बच गई अगली बार जान से खत्म कर दूंगा।
डीएनए रिपोर्ट ने पहुंचाया सलाखों के पीछे
शिकायत दर्ज होने के बाद पुलिस थाना कोतवाली ने तत्परता दिखाते हुए आरोपी के खिलाफ विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज कर जांच शुरू की। विवेचना के दौरान पुलिस ने घटनास्थल का नक्शा तैयार किया, महत्वपूर्ण साक्ष्य जब्त किए और गवाहों के बयान दर्ज कर आरोपी को गिरफ्तार किया। मामले में आरोपी तुलसीराम का डीएनए टेस्ट कराया गया। पीडि़ता के नमूनों से मिलान होने पर डीएनए रिपोर्ट पॉजिटिव आई, जिसने अदालत में आरोपी के खिलाफ पुख्ता सबूत का काम किया।
न्यायालय ने इन धाराओं में माना दोषी
विचारण के दौरान अभियोजन पक्ष ने न्यायालय के समक्ष कुल 14 गवाहों के बयान दर्ज कराए। दोनों पक्षों की दलीलें और वैज्ञानिक साक्ष्य डीएनए रिपोर्ट देखने के बाद न्यायालय ने आरोपी तुलसीराम को दोषी पाया। कोर्ट ने उसे पॉक्सो अधिनियम की धारा और एससी-एसटी एक्ट की धारा के तहत आजीवन कारावास की सजा सुनाई। इसके अलावा अन्य आरोपित धाराओं में 01-01 वर्ष के सश्रम कारावास और कुल 4700 रुपये के अर्थदंड से दंडित किया। अर्थदंड न चुकाने पर अतिरिक्त सजा भुगतनी होगी। इस मामले में शासन की ओर से अभियोजन संचालन विशेष लोक अभियोजक पॉक्सो एक्ट आशीष त्यागी एवं रेखा यादव द्वारा किया गया।

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