झमाझम बारिश से धान रोपाई ने पकड़ी रफ्तार, बुदनी-भैरुंदा में 31 हजार हेक्टेयर में लगी फसल
31 जुलाई तक 40 हजार का लक्ष्य पूरा होने की उम्मीद

सीहोर। जिले में पिछले कुछ दिनों से जारी झमाझम बारिश के बाद किसानों के चेहरे खिल उठे हैं। अनुकूल मौसम मिलते ही बुदनी और भैरुंदा क्षेत्र में धान की रोपाई के काम ने तेज रफ्तार पकड़ ली है। कृषि विभाग से प्राप्त आंकड़ों के अनुसार जिले में तय लक्ष्य के मुकाबले अब तक 31 हजार हेक्टेयर जमीन में धान की रोपाई पूरी हो चुकी है, जबकि शेष 9 हजार हेक्टेयर में 31 जुलाई तक रोपाई का काम पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।
बता दें जिले में धान की खेती मुख्य रूप से बुदनी और भैरुंदा तहसील क्षेत्रों तक ही सीमित है, जहां किसान बड़े पैमाने पर इसकी खेती करते हैं। इस साल कृषि विभाग ने पूरे जिले में धान का कुल रकबा 40 हजार हेक्टेयर निर्धारित किया है। मानसून की मेहरबानी से 10 जुलाई के बाद खेतों में तेजी से काम हुआ और अधिकांश किसान धान की रोपाई पूरी कर निश्चिंत हो चुके हैं।
प्रति एकड़ 15 से 25 क्विंटल तक पैदावार
कृषि विशेषज्ञों के मुताबिक क्षेत्र में मुख्य रूप से दो प्रकार की धान उगाई जाती है, जिसमें मोटा धान इसकी पैदावार औसतन 20 से 25 क्विंटल प्रति एकड़ होती है, जिसे किसान सरकारी समर्थन मूल्य केंद्रों पर बेचते हैं। जबकि बासमती धान इसकी पैदावार 15 से 16 क्विंटल प्रति एकड़ रहती है।
बासमती के प्रति बढ़ा किसानों का रुझान
बासमती धान की पैदावार भले ही मोटे धान से कम हो, लेकिन बाजार में इसके दाम काफी बेहतर मिलते हैं। निजी कंपनियां और बाहरी व्यापारी खेतों से ही सीधे इसे अच्छे दामों पर खरीद लेते हैं, वहीं कई किसान मंडी ले जाकर भी इसे बेचते हैं। बेहतर मुनाफा मिलने के कारण पिछले कुछ वर्षों में किसानों का रुझान बासमती धान उगाने की ओर तेजी से बढ़ा है।
2021 में सबसे ज्यादा हुई थी रोपाई
जिले में बीते 9 वर्ष के धान के रकबे की बात करें तो साल 2018 में 32 हजार 900 हेक्टेयर में बोवनी हुई थी, 2019 में 33,790, 2020 में 34110, 2021 में 51,450, 2022 में 45000, 2023 में 40000, 2024 में 40000, 2025 में 45000 और 2026 में 40000 हेक्टेयर रोपाई का लक्ष्य रखा है।
इनका कहना है
इस साल जिले में धान का कुल रकबा 40 हजार हेक्टेयर तय किया गया है, जिसमें से 31 हजार हेक्टेयर में रोपाई पूरी हो चुकी है। शेष बची जमीनों पर भी तेजी से रोपाई का काम चल रहा है, जो समय रहते पूरा कर लिया जाएगा।
एके उपाध्याय, उप संचालक कृषि विभाग सीहोर



