शादी का झांसा देकर नाबालिग को भगा ले गया था आरोपी, कोर्ट ने सुनाई सजा

सीहोर। थाना श्यामपुर क्षेत्र के अंतर्गत नाबालिग बालिका को उसके घर से बहला-फुसलाकर भगा ले जाने और उसके साथ दुष्कर्म करने के मामले में न्यायालय ने फैसला सुनाया है। पॉक्सो न्यायालय सीहोर की विशेष न्यायाधीश स्मृता सिंह ठाकुर ने आरोपी विशाल अहिरवार को दोषी ठहराते हुए 20 वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। साथ ही न्यायालय ने पीडि़ता को 1 लाख रुपये की प्रतिकर राशि प्रदान करने का भी आदेश दिया है। मामले में शासन की ओर से पैरवी विशेष लोक अभियोजक आशीष त्यागी द्वारा की गई।
अभियोजन पक्ष के अनुसार 20 अगस्त 2024 को पीडि़ता के पिता ने थाना श्यामपुर में अपनी 16 वर्षीय नाबालिग पुत्री की गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। उन्होंने बताया था कि 19 अगस्त 2024 की रात रक्षाबंधन का त्योहार मनाने के बाद परिवार खाना खाकर सो गया था। देर रात करीब 1 बजे जब आंख खुली तो उनकी 9वीं कक्षा में पढऩे वाली बेटी घर पर नहीं थी।
शादी का झांसा देकर ले गया था महाराष्ट्र
पुलिस विवेचना के दौरान 26 अगस्त 2024 को पीडि़ता को बरामद किया गया। पीडि़ता के बयानों से खुलासा हुआ कि पड़ोस में रहने वाला आरोपी विशाल अहिरवार निवासी ग्राम रावणखेड़ा उससे बातचीत करता था और शादी का झांसा देता था। 20 अगस्त की रात आरोपी विशाल अपने साथियों के साथ मोटरसाइकिल से आया और पीडि़ता को महाराष्ट्र के अमरावती जिले में स्थित अपने माता-पिता के घर ले गया। इसके बाद वे ग्राम मासोद चले गए, जहां देवस्थान पर तुलसी के पौधे के सामने नकली शादी रचाई और आरोपी ने नाबालिग के साथ कई बार शारीरिक संबंध बनाए।
20 साल के कारावास की सजा
श्यामपुर पुलिस ने इस मामले में 26 अगस्त 2024 को आरोपी को गिरफ्तार कर पीडि़ता का चिकित्सीय परीक्षण कराया और धारा 164 के तहत बयान दर्ज कराए। विवेचना पूर्ण कर चालान न्यायालय में पेश किया गया। विशेष लोक अभियोजक आशीष त्यागी द्वारा प्रस्तुत साक्ष्यों, चिकित्सा रिपोर्ट और अंतिम तर्कों से सहमत होते हुए पॉक्सो न्यायालय ने आरोपी विशाल अहिरवार को 20 वर्ष का कारावास एवं 2000 रुपये के अर्थदंड से दंडित किया। न्यायालय ने पीडि़ता की मानसिक व शारीरिक क्षति को देखते हुए उसे 1 लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने का भी निर्णय सुनाया।



