मां पार्वती के तट पर गूंजे वेदमंत्र, विधि-विधान से संपन्न हुआ विप्रजनों का श्रावणी पर्व

सीहोर। विप्र समाज और यज्ञोपवीतधारी द्विजों का पवित्र महापर्व श्रावणी उपाकर्म शुक्रवार को आष्टा नगर के प्राचीन शंकर मंदिर और पतित पावनी मां पार्वती के तट पर वैदिक परंपरा के साथ संपन्न हुआ। नगर पुरोहित पं. मनीष पाठक के मुख्य आचार्यत्व में आयोजित इस पावन अनुष्ठान में बड़ी संख्या में विप्रजनों ने सहभागिता कर संकल्प, संस्कार और स्वाध्याय का नया अध्याय शुरू किया।
श्रावणी पर्व का शुभारंभ प्रायश्चित संकल्प के साथ हुआ। मां पार्वती तट पर विप्रजनों ने पंचगव्य ग्रहण कर पवित्र कुश एवं आड़ीझारे से स्नान किया। इसके बाद पूरे वैदिक मंत्रोचार के साथ पुराना यज्ञोपवीत (जनेऊ) त्यागकर नया यज्ञोपवीत धारण किया गया। नगर पुरोहित पं. मनीष पाठक ने बताया कि सनातन परंपरा में यज्ञोपवीत धारण करने से व्यक्ति को द्विज यानी दूसरा जन्म प्राप्त होता है, जो उसे धर्म, संयम और स्वाध्याय के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है।
ऋषि पूजन और यज्ञ में आहुतियां
सामूहिक स्नान व तर्पण के बाद द्विजजनों ने सप्तऋषियों का पूजन कर सूर्यदेव की उपासना की। वेदमंत्रों की गूंज के बीच यज्ञ कुंड में आहुतियां समर्पित की गईं। विप्रजनों ने एक-दूसरे को यज्ञोपवीत समर्पित कर परस्पर भाईचारे का संदेश दिया और समाज के वरिष्ठजनों का चरण स्पर्श कर आशीर्वाद प्राप्त किया।
जनप्रतिनिधियों ने किया ब्राह्मणों का अभिनंदन
कार्यक्रम के दौरान सामाजिक व राजनीतिक लोगों ने विप्रजनों का सम्मान किया। नगर पालिका अध्यक्ष प्रतिनिधि राय सिंह मेवाड़ा, पार्षद रवि शर्मा एवं मित्र मंडल ने आचार्य पं. मनीष पाठक सहित सभी ब्राह्मणों का पुष्पमाला पहनाकर अभिनंदन किया। इसके साथ ही कांग्रेस के वरिष्ठ नेता प्रदीप प्रगति ने भी मां पार्वती तट पर उपस्थित होकर ब्राह्मणजनों का तिलक लगाकर स्वागत-अभिनंदन किया।
इस आयोजन में पं. कांतिलाल जोशी, साहित्यकार पं. श्याम शर्मा सलिल, पं. सतीश पंडिया, नगर पुरोहित पं. महेंद्र पाठक, पं. उदय श्रोत्रीय, ज्योतिषाचार्य आचार्य अमित तिवारी, डॉ. दीपेश पाठक, पार्षद पं. रवि शर्मा, पं. संतोष जोशी, पं. संतोष दुबे, प्रदेश उपाध्यक्ष कमल वैष्णव, सेवा संघ नगर अध्यक्ष निर्मल वैष्णव, पं. ओमप्रकाश शर्मा, पं. पुरुषोत्तम शर्मा, महंत मनोहर दास बैरागी, पं. प्रियांक पाठक, पं. शैलेंद्र शर्मा, शंकर मंदिर महंत राजगीर गिरी, गणेश मंदिर महंत विष्णुदास, पं. उज्जवल पंड्या, मुकेश वैष्णव, कान्हा बैरागी, अरमिंदम पाठक, पं. हितेश शर्मा, पं. पार्थ पाठक, पं. यज्ञ पाठक, त्रयांश पाठक, सुनील बागवान, शांतिलाल धनगर सहित बड़ी संख्या में विप्र व द्विजजन उपस्थित रहे।



