राजा विक्रमादित्यकालीन 2000 वर्ष पुराने चिंतामन मंदिर में गणेशोत्सव की शुरुआत
स्वयंभू प्रतिमा के दर्शन के लिए उमड़ी भीड़, उल्टा स्वस्तिक बनाकर मनोकामना मांग रहे भक्त, 10 की जगह 12 दिन चलेगा महोत्सव

सीहोर। जिला मुख्यालय स्थित ऐतिहासिक एवं प्रसिद्ध सिद्धपीठ चिंतामन गणेश मंदिर में सोमवार से 12 दिवसीय भव्य गणेश जन्मोत्सव का शुभारंभ हो गया है। भाद्रपद शुक्ल पक्ष की गणेश चतुर्थी पर सर्वार्थ सिद्धि योग के साथ शुरू हुआ यह पावन उत्सव अनंत चतुर्दशी 25 सितंबर तक चलेगा। तडक़े से ही ढोल-नगाड़ों और जय गणेश के जयकारों के साथ हजारों श्रद्धालु बप्पा के दर्शन के लिए मंदिर प्रांगण पहुंच रहे हैं।
बता दें सीहोर का यह गणेश मंदिर न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र है, बल्कि इसका इतिहास 2000 वर्षों से भी अधिक पुराना है। इतिहासकारों के अनुसार यह प्रतिमा उज्जैन के सम्राट राजा विक्रमादित्य के काल विक्रम संवत 155 के आसपास की स्वयंभू मूर्ति है। प्राचीन काल में इसी परम सिद्ध गणेशधाम की उपस्थिति के कारण इस शहर को सिद्धपुर के नाम से जाना जाता था, जो कालांतर में बदलकर सीहोर हो गया।
12 दिनों तक रोज होगा अनूठा और मनमोहक श्रृंगार
मंदिर के पुजारी पंडित जय दुबे ने बताया कि तिथियों के दुर्लभ संयोग के कारण इस वर्ष गणेश उत्सव 10 दिनों के बजाय 12 दिनों का होगा। इन 12 दिनों में श्रद्धालुओं के लिए विशेष सुरक्षा व्यवस्था की गई है। उत्सव के हर दिन भगवान श्री चिंतामन गणेशजी का अलग-अलग दिव्य स्वरूपों में मनमोहक श्रृंगार किया जाएगा, जिससे भक्तों को प्रतिदिन भगवान के नए रूप का दर्शन प्राप्त होगा।
उल्टा स्वस्तिक बनाने की अनूठी परंपरा
इस मंदिर की सबसे बड़ी विशेषता मनोकामना पूर्ति की परंपरा है। श्रद्धालु अपनी मन्नत मांगने के लिए मंदिर की दीवार पर उल्टा स्वस्तिक बनाते हैं। मान्यता है कि सिद्धपुर के चिंतामन गणेश अपने दर पर आए भक्तों की झोली कभी खाली नहीं रखते। मनोकामना पूरी होने के बाद श्रद्धालु पुन: मंदिर आकर दीवार पर सीधा स्वस्तिक बनाते हैं और भगवान को चोला, अभिषेक तथा मोदक का भोग अर्पित कर आभार जताते हैं।



