खबरदार! बिजली कंपनी की शिकायत की तो भुगतना पड़ेगा जुर्माना, खानी पड़ सकती है जेल की हवा

सीहोर। बिजली कंपनी की अव्यवस्था और कर्मचारियों के अभद्र व्यवहार की शिकायत करना एक किसान को इस कदर भारी पड़ गया कि उसे न केवल 55 हजार 121 रुपए का भारी-भरकम बिजली चोरी का असेसमेंट बिल थमा दिया गया, बल्कि जेल भेजने की धमकियां भी दी जा रही हैं।
मामला रेहटी तहसील के ग्राम नयागांव का है। पीडि़त किसान उपभोक्ता दीपक लोधा ने बताया कि उनके गांव में बिजली के केबल की गड़बड़ी थी, जिसे सुधारने के लिए वे बिजली ऑफिस पहुंचे। जब उन्होंने कनिष्ठ अभियंता राहुल सिंह से बात की तो उन्होंने लाइनमैन अनिल चौहान से संपर्क करने को कहा। किसान दीपक का आरोप है कि लाइनमैन अनिल चौहान ने गाली-गलौज करते हुए अभद्र भाषा का प्रयोग किया और काम करने से साफ मना कर दिया।
जब उपभोक्ता ने इस अभद्र व्यवहार की शिकायत जेई राहुल सिंह से की तो उनका रवैया भी गैर-जिम्मेदाराना रहा। इसके बाद स्थानीय जनप्रतिनिधियों की सलाह पर पीडि़त ने 15 सितंबर को सहायक अभियंता रेहटी को लाइनमैन के खिलाफ पैसे लेकर काम न करने व गाली-गलौज करने की लिखित शिकायत की, जिसकी पावती भी किसान के पास मौजूद है साथ ही सीएम हेल्पलाइन पर भी शिकायत दर्ज कराई गईं।
शिकायत वापस लेने का बनाया दबाव
शिकायत दर्ज होने से नाराज जेई राहुल सिंह और लाइनमैन अनिल चौहान ने पीडि़त को फोन पर और ऑफिस बुलाकर धमकी दी कि अगर शिकायत वापस नहीं ली तो उसे झूठे केस में फंसाकर जेल भिजवा देंगे। प्रताडऩा और मानसिक दबाव से तंग आकर पीडि़त ने सीएम हेल्पलाइन की शिकायत फोन के जरिए वापस भी ले ली, लेकिन इसके बावजूद बिजली कंपनी के अधिकारियों ने बदले की भावना से कार्रवाई कर डाली। 23 सितंबर को जेई राहुल सिंह द्वारा किसान के खलिहान का निरीक्षण कर बिजली चोरी के तहत 55 हजार 121 का असेसमेंट बिल जारी कर दिया गया।
पंचनामे में फर्जीवाड़े और भेदभाव के आरोप
पीडि़त दीपक लोधी ने कार्यपालन यंत्री बुधनी संभाग को लिखित आपत्ति दर्ज कराते हुए बिजली कंपनी की इस कार्रवाई को पूरी तरह एकपक्षीय, द्वेषपूर्ण और फर्जी करार दिया है। किसान ने अपनी आपत्ति में बताया कि कृषि प्रयोजन हेतु उपयोग में आने वाले खलिहान को गलत तरीके से गैर-घरेलू श्रेणी में दर्ज कर दिया गया। मौके पर केवल 10 वाट का एक सीएफएल बल्ब जल रहा था, जबकि पंचनामे में फर्जी तरीके से 750 वाट की मोटर का भार दर्शा दिया गया। स्थल निरीक्षण के पंचनामे पर न तो उपभोक्ता के हस्ताक्षर हैं और न ही गांव के किसी स्वतंत्र गवाह के। बिजली चोरी की धारा 135 का इस्तेमाल केवल बदला लेने के उद्देश्य से किया गया है। जिस डीपी-पोल से कनेक्शन होना बताया गया है, उसी पोल से गांव के कई अन्य लोगों की डोरियां भी बंधी हैं, लेकिन कार्रवाई केवल शिकायत करने वाले उपभोक्ता पर ही की गई।
पीडि़त ने लगाई न्याय की गुहार
पीडि़त किसान का कहना है कि वह अपने घर और खेत दोनों का बिजली बिल नियमित जमा करता है, इसके बावजूद उसे इस तरह प्रताडि़त किया जा रहा है। पीडि़त ने चेतावनी दी है कि यदि उसके साथ कोई अप्रिय घटना होती है तो इसके सीधे जिम्मेदार जेई राहुल सिंह और लाइनमैन अनिल चौहान होंगे। किसान ने कार्यपालन यंत्री से 55 हजार 121 का फर्जी बिल निरस्त करने, निष्पक्ष जांच कराने और दोषियों पर सख्त कार्रवाई करने की मांग की है।



