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अंतर्राष्ट्रीय वृद्ध दिवस विशेष: उम्र को मात दे रही योग की पाठशाला

सीहोर। उम्र सिर्फ एक आंकड़ा है, अगर इरादे बुलंद हों और जीवनशैली अनुशासित। अंतर्राष्ट्रीय वृद्ध दिवस के अवसर पर सीहोर के वरिष्ठ नागरिकों ने इस बात को पूरी तरह चरितार्थ कर दिखाया है। जहां बढ़ती उम्र के साथ अक्सर लोग बीमारियों और दवाइयों के घेरे में आ जाते हैं, वहीं शहर के मंडी स्थित पुलिस लाइन ग्राउंड में सुबह 6 बजे जुटने वाले बुजुर्ग योग और प्राणायाम के बूते उम्र को मात दे रहे हैं। योग की पाठशाला से जुड़े ये वरिष्ठ नागरिक न केवल खुद को पूरी तरह निरोगी रख रहे हैं, बल्कि आज की युवा पीढ़ी को भी अनुशासित जीवनशैली और बेहतर स्वास्थ्य का मजबूत संदेश दे रहे हैं।
ग्रुप के सदस्य कपिल सूर्यवंशी ने बताया कि योग की पाठशाला से शहर के कई गणमान्य और वरिष्ठ नागरिक नियमित रूप से जुड़े हुए हैं। योगाचार्य दिनेश शर्मा द्वारा यहां नि:शुल्क योग सिखाया जा रहा है। योग की पाठशाला में सबसे उम्रदराज 84 वर्षीय सेवानिवृत्त शिक्षक चरण सिंह राजपूत हैं, जो इस उम्र में भी पूरी ऊर्जा के साथ योगाभ्यास करते हैं। उनके साथ एमपीईबी से सेवानिवृत्त 70 वर्षीय मांगीलाल मालवीय, 64 वर्षीय गल्ला व्यापारी राजेश खण्डेलवाल, 62 वर्षीय गल्ला व्यापारी राजकुमार राठौर, 61 वर्षीय शर्मा मावा भण्डार के संचालक सुभाष शर्मा, 60 वर्षीय खाद व्यापारी बाबूलाल मेवाड़ा, 60 वर्षीय खाद व्यापारी हनुमत मेवाड़ा, 55 वर्षीय ठेकेदार वीरेंद्र सिंह, 57 वर्षीय व्यापारी राजेश गुप्ता और 53 वर्षीय सोसायटी कर्मचारी भारत सिंह चौहान प्रतिदिन समय पर मैदान पहुंचकर योग साधना करते हैं। 62 वर्षीय योगाचार्य दिनेश शर्मा शिक्षक सभी को नियमित रूप से योगाभ्यास और प्राणायाम कराते हैं।
योग के साथ सामाजिक सरोकारों में भी अग्रणी
कपिल सूर्यवंशी ने बताया कि यह ग्रुप केवल अपनी सेहत तक ही सीमित नहीं है। योग की पाठशाला सामाजिक सरोकारों और जनसेवा में भी हमेशा आगे रहती है। यह समूह पर्यावरण संरक्षण, जल संरक्षण, प्रकृति की रक्षा और विभिन्न सामाजिक व शैक्षणिक अभियानों में सक्रिय भूमिका निभाता है। समय-समय पर जरूरतमंद बच्चों को शैक्षणिक सामग्री का वितरण करने से लेकर शहर में जनजागरूकता फैलाने का काम भी इस ग्रुप द्वारा निस्वार्थ भाव से किया जा रहा है।
शरीर पूरी तरह स्वस्थ है, डॉक्टर और दवाइयों से दूर हूं
रिटायर्ट शिक्षक चरण सिंह राजपूत राजपूत बताते हैं कि इस उम्र में लोग बीमारियों और दवाइयों से घिरे रहते हैंए लेकिन योग की बदौलत मैं पूरी तरह स्वस्थ हूं। मुझे न कोई शारीरिक तकलीफ है और न ही डॉक्टरों के चक्कर लगाने पड़ते हैं। नियमित योग ही मेरी लंबी और निरोगी जिंदगी का असली राज है।
पूरा दिन तरोताजा और ऊर्जावान बीतता है
राजेश खण्डेलवाल कहते हैं कि सुबह एक घंटे का योग मेरे पूरे दिन को ताजगी से भर देता है। व्यापार के दिनभर के तनाव के बावजूद शाम तक कोई थकान महसूस नहीं होती। योग ने मुझे शारीरिक ही नहीं, बल्कि मानसिक रूप से भी बेहद मजबूत बनाया है।
उम्र सिर्फ एक नंबर है,े अगर आप योग से जुड़े हैं
मांगीलाल मालवीय बताते हैं कि रिटायरमेंट के बाद अक्सर लोग सुस्त हो जाते हैं, लेकिन योग ने मुझे दोबारा नई ऊर्जा से भर दिया है। अब खुद को उम्रदराज महसूस ही नहीं करता। हर व्यक्ति को अपनी दिनचर्या में से कम से कम एक घंटा योग के लिए जरूर निकालना चाहिए।
दवाइयों से बचना है तो योग अपनाना ही होगा
सुभाष शर्मा कहते हैं कि भागदौड़ भरी जिंदगी में सेहत की अनदेखी भारी पड़ती है। जब से नियमित योग शुरू किया है शरीर की छोटी-मोटी तकलीफें खुद ब खुद गायब हो गईं। मेरा मानना है कि स्वस्थ रहने के लिए योग से बेहतर और कोई विकल्प नहीं है।
स्वस्थ शरीर से ही होगा स्वस्थ राष्ट्र का निर्माण
योगाचार्य दिनेश शर्मा ने शहरवासियों को योग अपनाने की सलाह देते हुए कहा हर व्यक्ति को प्रतिदिन योग और प्राणायाम को अपने जीवन का हिस्सा बनाना चाहिए। योग केवल कसरत नहीं है, बल्कि जीवन जीने की कला है। नियमित प्राणायाम से शरीर की प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है और मन शांत रहता है। जब हमारा शरीर स्वस्थ रहेगा, तभी एक स्वस्थ समाज और सशक्त राष्ट्र का निर्माण संभव हो सकेगा।

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