Newsआष्टाइछावरजावरधर्मनसरुल्लागंजबुदनीमध्य प्रदेशरेहटीसीहोर

गजराज पर सवार होकर आ रहीं मां जगदम्बा, इस बार 10 दिनों का होगा शक्ति पर्व

सीहोर। शक्ति की उपासना का महापर्व शारदीय नवरात्रि इस बार श्रद्धालुओं के लिए विशेष सुख-समृद्धि और आरोग्य लेकर आ रहा है। आश्विन मास की यह प्रकट नवरात्रि 11 अक्टूबर रविवार से शुरू होकर 20 अक्टूबर मंगलवार तक पूरे 10 दिनों तक मनाई जाएगी। ज्योतिष शास्त्र एवं श्रीमद्भागवत देवी पुराण के अनुसार जब नवरात्रि का शुभारंभ रविवार के दिन होता है, तब मां दुर्गा का आगमन हाथी ‘गज’ की सवारी पर होता है।
पंडित सुनील शर्मा के अनुसार माता रानी का हाथी पर सवार होकर आना बेहद शुभ संकेत माना जाता है। जब देवी भगवती गजराज पर विराजकर आती हैं तो देश-प्रदेश में वर्षा, कृषि क्षेत्र में उन्नति, व्यापार में बढ़ोतरी और भारतीय अर्थव्यवस्था में मजबूती के योग बनते हैं। इस बार नवरात्रि पूरे 10 दिनों की होने के साथ-साथ सर्वार्थ सिद्धि योग और अमृत सिद्धि योग के दुर्लभ संयोग में आ रही है, जो हर प्रकार की मनोकामना पूर्ति और साधना के लिए उत्तम है।
वर्ष में चार नवरात्रि, दो प्रत्यक्ष और दो गुप्त
पंडित शर्मा ने बताया कि सनातन परंपरा में वर्ष में कुल चार नवरात्रि आती हैं। इनमें चैत्र और आश्विन मास की नवरात्रि प्रत्यक्ष होती हैं, जबकि माघ और आषाढ़ मास की नवरात्रि गुप्त नवरात्रि कहलाती हैं। नवरात्रि के पावन दिनों में साधक अपनी आध्यात्मिक और मानसिक शक्ति के संवर्धन के लिए उपवास, संयम, नियम, जप-तप और योग साधना करते हैं।
नौ दिनों में मां भगवती के नौ स्वरूपों की साधना
प्रथम दिन: मां शैलपुत्री
द्वितीय दिन: मां ब्रह्मचारिणी
तृतीय दिन: मां चंद्रघंटा
चतुर्थ दिन: मां कुष्मांडा
पंचम दिन: मां स्कंदमाता
षष्ठम दिन: मां कात्यायनी
सप्तम दिन: मां कालरात्रि
अष्टम दिन: मां महागौरी
नवम दिन: मां सिद्धिदात्री
यह रहेगी पूजा विधि
पंडित शर्मा के अनुसार प्रतिपदा प्रथम दिन के शुभ मुहूर्त में संकल्प लेकर कलश/घट स्थापना की जाती है, साथ ही अखंड ज्योत प्रज्वलित कर जावरे बोए जाते हैं। प्रतिदिन सुबह और शाम मां दुर्गा, भगवान शिव और भैरव जी की विधिवत पूजा-अर्चना करनी चाहिए। नवरात्रि के दौरान दुर्गा सप्तशती और दुर्गा चालीसा का पाठ करने से शिव-शक्ति अत्यंत प्रसन्न होकर साधक की सभी मनोकामनाएं पूरी करती हैं। नवमी के दिन दुर्गा सप्तशती के मंत्रों से हवन ‘पूर्णाहूति’ संपन्न किया जाता है। इसके पश्चात कन्या पूजन और भोजन कराकर व्रत का पारण किया जाता है।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button