क्रिसेंट गरबा महोत्सव पर गरमाई राजनीति, इंदौर में राहुल गांधी को स्टेडियम नहीं मिला तो सीहोर में खेल परिसर कैसे दे दिया

सीहोर। शहर में स्थित मध्य प्रदेश के एकमात्र आवासीय खेलकूद संस्थान परिसर में क्रिसेंट गरबा महोत्सव के आयोजन को लेकर राजनीति गरमा गई है। अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के सदस्य हरपाल ठाकुर ने इस संबंध में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, कलेक्टर, जनप्रतिनिधियों और आम नागरिकों से अपील जारी कर शिक्षण परिसरों का उपयोग गैर-शैक्षणिक गतिविधियों के लिए न किए जाने की मांग उठाई है।
हरपाल ठाकुर ने कहा कि यह संस्थान प्रदेश का एक प्रतिष्ठित केंद्र है, जहां छात्र रहकर पढ़ाई और खेलकूद का अभ्यास एक साथ करते हैं। सरकार ने इस संस्थान की स्थापना छात्रों के खेल कौशल को निखारने के लिए की थी, लेकिन अब इसके परिसर का उपयोग निजी कार्यक्रमों के लिए किया जा रहा है।
15 से 20 दिनों तक अभ्यास, पढ़ाई प्रभावित
प्रस्तावित गरबा महोत्सव 14, 15 और 16 अक्टूबर को आयोजित होना है, लेकिन इसकी तैयारियों और रिहर्सल के चलते पिछले 4-5 दिनों से परिसर में गतिविधियां चल रही हैं। हरपाल ठाकुर का आरोप है कि इस प्रकार लगभग 15 से 20 दिनों के लिए पूरा आवासीय परिसर गरबा महोत्सव की गतिविधियों में व्यस्त रहेगा। उन्होंने बताया कि संस्थान परिसर में ही छात्रों का हॉस्टल और महिला पॉलिटेक्निक छात्रावास स्थित है। लगातार 20 दिनों तक व्यावसायिक या सांस्कृतिक आयोजन चलने से छात्रावासों में रह रहे विद्यार्थियों की पढ़ाई और खेल अभ्यास बुरी तरह प्रभावित होगा।
हाईकोर्ट के आदेशों का हवाला
कांग्रेस नेता ने सवाल उठाया कि जब हाईकोर्ट और शिक्षा विभाग के स्पष्ट दिशा-निर्देश हैं कि किसी भी शैक्षणिक संस्थान का परिसर अन्य गतिविधियों के लिए लंबे समय तक नहीं दिया जा सकता तो फिर यह परिसर किस आधार पर आवंटित किया गया। उन्होंने कहा कि सीहोर में सांस्कृतिक कार्यक्रमों की समृद्ध परंपरा रही है, लेकिन इसके लिए बाल बिहार मैदान या अन्य वैकल्पिक स्थान चुने जा सकते थे। आयोजक समूह स्वयं सक्षम है और वे अपने निजी कैंपस में भी यह आयोजन कर सकते हैं। शैक्षणिक संस्थानों को इस तरह महीनों या हफ्तों के लिए देने की गलत परंपरा की शुरुआत नहीं होनी चाहिए।
इंदौर स्टेडियम के फैसले से की तुलना
हरपाल ठाकुर ने इंदौर के उदाहरण से तुलना करते हुए कहा कि वहां लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के कार्यक्रम के लिए नेहरू स्टेडियम एक दिन के लिए भी नहीं दिया गया और रीजनल पार्क के सामने की जमीन का 14 लाख रुपये किराया लिया गया। वहीं सीहोर के इस प्रमुख खेल संस्थान के परिसर को 15-20 दिनों के लिए आसानी से उपलब्ध करा दिया गया। उन्होंने कहा कि यह कोई राजनीतिक मुद्दा नहीं, बल्कि शहर के शैक्षणिक और खेल ढांचे को सुरक्षित रखने का नैतिक सवाल है। उन्होंने उम्मीद जताई कि जिला प्रशासन और आयोजक संवेदनशीलता दिखाते हुए इस गरबा महोत्सव को किसी अन्य उपयुक्त स्थान पर स्थानांतरित करेंगे ताकि विद्यार्थियों को असुविधा न हो।



