भोपालमध्य प्रदेश

मौलाना मदनी के बयान पर बोले पंडोखर सरकार, मुस्‍लिम लोग ओम को अल्‍लाह मान रहे, इससे अच्‍छा क्‍या

भोपाल !    कुछ दिन पूर्व एक धर्मसभा में जमीअत ए उलमा के मौलाना मदनी द्वारा ओम और अल्‍लाह के बारे में दिए गए बयान पर देशभर में बवाल मचा है। इस पर संत गुरुशरण महाराज (पंडोखर सरकार) ने भी प्रतिक्रिया दी है। उन्‍होंने कहा कि ओम में, राम में, ईश्वर में ही संपूर्ण ब्रह्म को जानता हूं। मुस्लिम लोग ओम को अल्लाह मान रहे हैं और अल्लाह को ओम, इससे अच्छा और कुछ नहीं हो सकता। नेहरू नगर स्थित कलियासोत मैदान में पंडित राजन महाराज की श्रीराम कथा में दरबार लगाने आए संत गुरुशरण महाराज (पंडोखर सरकार) ने मीडिया से चर्चा में विभिन्‍न मुद्दों पर खुलकर बात की। उन्होंने बागेश्वर धाम के पंडित धीरेंद्र शास्त्री का नाम लिए बगैर कहा कि प्रदेश व देश में कई संत ऐसे हैं, जो पर्चे बनाकर किसी के जीवन में आई समस्याओं का निदान करने का भरोसा दिलाते हैं। पर्चा बनाना कोई चमत्‍कार नहीं हैं, किसी की बिगड़ी बन जाना चमत्कार है।

श्‍याम मानव को दी चुनौती

पंडोखर सरकार ने नागपुर में भी दरबार लगाने की बात कही। उन्‍होंने श्याम मानव को चुनौती दी कि पंडोखर सरकार धाम आकर देखो। मुझसे बहस कर लें। ज्ञात हो कि अंधश्रद्धा निर्मूलन समिति के संस्थापक व नागपुर की जादू-टोना विरोधी नियम जनजागृति प्रचार-प्रसार समिति के सह-अध्यक्ष श्याम मानव पिछले दिनों श्री बागेश्वर धाम सरकार के पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री की शिकायत नागपुर में पुलिस को करने पर सुर्खियों में आए थे। मानव का कहना था कि पर्चा बनाने वाले शास्त्री महाराज अंधविश्वास को बढ़ावा दे रहे हैं। पंडोखर महाराज ने जादूगर और दिमाग पढ़ने वाली सुहानी शाह को भी चुनौती दी।

सनातन बोर्ड बनाने की मांग

उन्‍होंने प्रदेश सरकार से सनातन बोर्ड बनाने की मांग रखी। उन्होंने कहा कि बोर्ड बनना चाहिए। इससे आचार्य, योगी, ब्राह्मण शामिल होंगे। भारतीय संस्कृति बचेगी। मंत्र-विद्या का सम्मान होगा। जब डिग्रियां मिलेंगी तो अंधविश्वास का शब्द समाप्त हो जाएगा। इससे सनातन धर्म बढ़ेगा और राम राज्य की स्थापना होगी।

एक बुजुर्ग को वापस लौटाया

दरबार में एक बुजुर्ग व्यक्ति आए। वह अपनी पत्नी की बार-बार तबीयत खराब होने की समस्या लेकर आए थे। पंडोखर महाराज ने उन्हें पहले वापस लौटाया। उनसे कहा कि जब आपको बुलाया जाए, तभी मेरे पास आना। बुजुर्ग वापस लौट गए। इसके कुछ देर बार पंडोखर महाराज ने उन्हें बुलाया।

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