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सलकनपुर मंदिर समिति का अवैध चंदा वसूली को लेकर पत्र, व्यापारी संघ की कड़ी आपत्ति

- सलकनपुर में वर्ष 2013 से लगातार चल रहा है मां अन्नपूर्णा सेवा समिति का भंडारा

सीहोर। जिले के प्रसिद्ध मां विजयासन धाम सलकनपुर में मंदिर समिति द्वारा अवैध चंदा वसूली को लेकर लिखे गए पत्र के बाद मामला सुर्खियों में है। मंदिर समिति अध्यक्ष महेश उपाध्याय ने पत्र में कहा है कि सलकनपुर मंदिर ट्रस्ट द्वारा सभी श्रद्धालुओं को सूचित किया जाता है कि कुछ लोग आसपास के क्षेत्रों में वाहनों से घूम-घूमकर सलकनपुर वाली माताजी एवं भंडारा कराने के नाम पर अन्नदान एवं दानराशि की नकली रसीदें देकर वसूली कर रहे हैं। इस संबंध में मंदिर ट्रस्ट को लगातार शिकायतें प्राप्त हो रही हैं। मंदिर ट्रस्ट द्वारा किसी भी व्यक्ति या संस्था को दानराशि या अन्नदान एकत्रित करने के लिए अधिकृत नहीं किया गया है। इस पत्र के बाद सलकनपुर व्यापारी संघ के अध्यक्ष एवं किसान कांग्रेस के प्रदेश सचिव अनिरूद्ध दुबे ने कड़ी आपत्ति जताते हुए कहा है कि मंदिर समिति का इशारा मां अन्नपूर्णा सेवा समिति की तरफ है, लेकिन समिति द्वारा सलकनपुर मंदिर के नाम से कोई सहयोग या दान नहीं लिया जाता है। मां अन्नपूर्णा सेवा समिति भंडारे के नाम से ही लोगों से सहयोग लेती है। इसमें भी किसी तरह की कोई जबरदस्ती नहीं की जाती है। जिनको सहयोग देना है वे दे सकते हैं और जो नहीं देना चाहते हैं उनसे जबरन नहीं लिया जाता है। उन्होंने कहा कि एक तरफ सलकनपुर मंदिर समिति में हर वर्ष करोड़ों रूपए का चंदा और चढ़ोतरी आती है, लेकिन यहां पर लोगों को पानी भी नसीब नहीं हो पाता है, सुविधाएं भी नहीं मिलती हैं। लोगों को गर्मी के दिनों में धूप में खड़े होकर दर्शन की लाइन में लगना पड़ता है। मां अन्नपूर्णा सेवा समिति यहां आने वाले श्रद्धालुओं को मात्र 25 रूपए के सेवा शुल्क पर भरपेट भोजन कराती है। नर्मदा परिक्रमावासी एवं बुजुर्गों को भोजन निःशुल्क कराया जाता है। यहां पर श्रद्धाभाव के साथ बैठाकर भोजन कराया जाता है, लेकिन इस पर भी मंदिर समिति को ऐतराज है।
2013 से लगातार चल रहा भंडारा-
सलकनपुर में मां अन्नपूर्णा सेवा समिति द्वारा वर्ष 2013 से लगातार भंडारा चलाया जा रहा है। समिति द्वारा पहले तो निःशुल्क ही लोगों को भोजन कराया जाता था। जो श्रद्धालु स्वेच्छा से दान दे जाए वह रख लिया जाता था। यह भंडारा आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों की मदद से ही संचालित होता है। अन्नपूर्णा सेवा समिति द्वारा आसपास के गांवों से सहयोग लिया जाता है और उसी से भंडारे का संचालन भी हो रहा है। समिति द्वारा यहां पर लोगों को 25 रूपए सेवा शुल्क लेकर भरपेट भोजन कराया जाता है। नर्मदा परिक्रमावासियों एवं बुजुर्गों व ऐसे असहाय जो राशि देने में सक्षम नहीं है उन्हें पूरी तरह निःशुल्क भोजन कराया जाता है। मां अन्नपूर्णा सेवा समिति द्वारा भंडारा प्रतिदिन सुबह 10 बजे से रात 8 बजे तक चलाया जाता है। इस दौरान यहां आने वाले श्रद्धालुओं को भरपेट भोजन कराया जाता है। भोजन में भी दाल, चावल, सब्जी, रोटी उपलब्ध कराई जाती है। यह मैन्यू प्रतिदिन बदलता भी रहता है।
ये बोले संचालक और समिति अध्यक्ष-
इस मामले में मां अन्नपूर्णा सेवा समिति के संचालक राजेश चंद्रवंशी का कहना है कि हमारा सलकनपुर मंदिर समिति से कोई लेना-देना नहीं है। हम मंदिर समिति के नाम से कोई सहयोग नहीं लेते हैं। हमारे द्वारा सहयोग भंडारे के नाम से ही लिया जाता है। इसमें जिसको देना है वह सहयोग देता है कोई जबरदस्ती नहीं की जाती है। भंडारा प्रतिदिन सुबह 10 बजे से रात 8 बजे तक चलता है।
मंदिर समिति के अध्यक्ष महेश उपाध्याय ने बताया कि हमने सिर्फ मंदिर समिति की ओर से पत्र जारी किया है। हमने किसी भी समिति या संस्था के उपर आरोप नहीं लगाए हैं। मंदिर के नाम से अवैध चंदा वसूली की शिकायत पुलिस को भी की गई है। किसान कांग्रेस के प्रदेश सचिव एवं सलकनपुर व्यापारी संघ के अध्यक्ष अनिरूद्ध दुबे ने कहा कि मां अन्नपूर्णा सेवा समिति 2013 से भंडारा चला रही है। यहां पर प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु भक्त भोजन करते हैं। मेला एवं नवरात्रि के दौरान तो यहां पर प्रतिदिन हजारों की संख्या में श्रद्धालु भोजन करते हैं। ऐसे में मंदिर समिति द्वारा लिखा गया पत्र आपत्तिजनक है। यदि मां अन्नपूर्णा सेवा समिति एक अच्छा काम कर रही है तो इसमें मंदिर समिति को भी सहयोग करना चाहिए, लेकिन वे ही इस पर आपत्ति जता रहे हैं।

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