डाबरी में काटे सागौन के 1000 पेड़, कलेक्ट्रेट पहुंचे ग्रामीणों ने जताया विरोध

सीहोर। भेरूंदा तहसील के ग्राम डाबरी स्थित जंगल में भू-माफिया और जंगल माफिया द्वारा बड़े पैमाने पर अवैध कटाई का मामला सामने आया है। वन भूमि पर कब्जा करने की नीयत से सागौन के एक हजार से अधिक हरे-भरे पेड़ों को कुल्हाड़ी से काटकर बलि चढ़ा दिया गया। इस घटना से आक्रोशित डाबरी गांव के दर्जनों ग्रामीण बैनर-पोस्टर लेकर कलेक्ट्रेट पहुंचे और उग्र प्रदर्शन करते हुए नारेबाजी की।
ग्रामीणों ने डिप्टी कलेक्टर गिरिराज परिहार को कलेक्टर के नाम ज्ञापन सौंपकर भू-माफिया और इस मामले में संलिप्त अधिकारियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की मांग की है।
ट्रैक्टर चलाकर जंगल की जमीन की समतल
ग्रामीणों ने बताया कि कम्पार्टमेंट नंबर आर.259, आर.260 और आर.459 में 50 एकड़ से अधिक जंगल की जमीन पर अवैध कटाई की गई। जब ग्रामवासियों ने मौके पर जाकर देखा तो वहां बड़े पैमाने पर सागौन के पेड़ कटे पड़े थे और जमीन को खेती योग्य बनाने के लिए ट्रैक्टर चलाकर समतल किया जा रहा था। ग्रामीणों का आरोप है कि यह पूरी घटना वन विकास निगम की चौकी के बिल्कुल पास हुई, जिससे विभाग के अधिकारियों व कर्मचारियों की भूमिका पूरी तरह संदिग्ध नजर आती है।
पर्यावरण संरक्षण के दावों की उड़ी धज्जियां
कलेक्ट्रेट पहुंचे ग्रामीणों ने नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा कि एक तरफ सरकार एक पेड़ मां के नाम जैसे अभियानों के जरिए करोड़ों रुपये खर्च कर पौधारोपण को बढ़ावा दे रही है, वहीं दूसरी तरफ वन विकास निगम की लापरवाही के चलते एक हजार सागौन के पेड़ों की हत्या कर दी गई। जिस विभाग की जिम्मेदारी वनों का संरक्षण करना है, वही आज कटघरे में खड़ा दिखाई दे रहा है।
अफसरों आपराधिक मामला दर्ज करने की मांग
ग्रामीणों ने ज्ञापन के माध्यम से प्रशासन के सामने अपनी प्रमुख मांगें रखीं, जिसमें वन भूमि पर चल रही अवैध कटाई और अतिक्रमण पर तुरंत रोक लगाई जाए। पर्यावरण और धरती को नुकसान पहुंचाने वाले अज्ञात भू-माफियाओं को तत्काल गिरफ्तार किया जाए। इस अवैध कटाई में संलिप्त या लापरवाही बरतने वाले वन विकास निगम के क्षेत्रीय अधिकारियों और कर्मचारियों पर आपराधिक मुकदमा दर्ज कर दंडात्मक कार्रवाई की जाए।
बड़ी संख्या में मौजूद रहे ग्रामीण
ज्ञापन देने वालों में सुनील मीणा, सोपान सिंह, श्रीकिशन, बाबूलाल जाट, लखनलाल, गौरीशंकर, रामलाल, अम्बाराम, तेजराम, ओम सिंह, मुकेश, पदम सिंह, नंदराम, मोहन सिंह, सतीश, फूलसिंह, सुरेश, थान सिंह, शेरसिंह, जसमत सिंह, परवेज, जमशेद, लक्ष्मीनारायण, मनोराम और साबिर सहित डाबरी गांव के बड़ी संख्या में ग्रामीण शामिल रहे।

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