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पुरुषोत्तम मास की सोमवती अमावस्या पर सर्वार्थ और अमृत सिद्धि योग का महासंयोग

सीहोर। इस वर्ष पुरुषोत्तम अधिक मास ज्येष्ठ मास में आने वाली अमावस्या पर धार्मिक और आध्यात्मिक दृष्टि से एक अत्यंत दुर्लभ और पवित्र संयोग बन रहा है। इस बार अमावस्या तिथि रविवार दोपहर 12 बजकर 22 मिनट से प्रारंभ होकर सोमवार को सुबह 8 बजकर 27 मिनट तक रहेगी। सोमवार को उदय तिथि होने के कारण जिले भर में सोमवती अमावस्या का महापर्व पूरे श्रद्धाभाव से मनाया जाएगा। इस खास दिन पर मृगशिरा नक्षत्र के साथ सर्वार्थ सिद्धि योग और अमृत सिद्धि योग का महासंयोग भी रहेगा, जो इस दिन के महत्व को कई गुना बढ़ा रहा है।
पंडित सुनील शर्मा के अनुसार पुरुषोत्तम अधिक मास स्वयं भगवान विष्णु को समर्पित अत्यंत पवित्र महीना माना जाता है। जब इस पावन महीने में सोमवार के दिन अमावस्या का योग बनता है तो यह हरि-हर यानी भगवान विष्णु और भगवान भोलेनाथ के मिलन का महासंयोग बन जाता है। इस दुर्लभ संयोग में की गई ईश्वर की आराधना, पूजा-पाठ और दान-पुण्य का फल साधारण दिनों की तुलना में अनंत गुना अधिक मिलता है। यह दिन आत्म-शुद्धि के लिए सबसे उत्तम माना गया है।
पवित्र नदियों में स्नान और पीपल पूजन का विशेष महत्व
सोमवती अमावस्या के पावन अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु मां नर्मदा और अन्य पवित्र नदियों के घाटों पर आस्था की डुबकी लगाएंगे। स्नान-ध्यान के बाद नदी तटों पर पूजन, अर्चन और भंडारे के आयोजन किए जाएंगे। पंडित शर्मा ने बताया कि इस दिन गायों को चारा खिलाना, भगवान शिव का रुद्राभिषेक, विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ, भगवान सत्यनारायण की कथा, गीता पाठ और पीपल के वृक्ष का पूजन व परिक्रमा करना विशेष रूप से फलदायी और कष्टों को हरने वाला होता है।
शाम को दीपदान से आएगी लक्ष्मी
सनातन धर्मग्रंथों के अनुसार प्रत्येक मनुष्य के लिए देव, ऋषि और पितृ तर्पण करना अनिवार्य माना गया है और अमावस्या तिथि पूरी तरह से पितरों को समर्पित होती है।
ऐसे करें तर्पण: इस दिन सुबह स्नान के बाद पूर्वजों का स्मरण करते हुए जल में काले तिल और जौ मिलाकर अघ्र्य देना चाहिए।
दान का महत्व: पितरों की आत्मशांति के लिए ब्राह्मणों और जरूरतमंदों को अन्न, वस्त्र का दान करना और उन्हें भोजन कराना चाहिए। मान्यता है कि इससे पितृ प्रसन्न होकर वंश वृद्धि और सुख-समृद्धि का आशीर्वाद देते हैं।
शाम को दीपदान: सोमवती अमावस्या की शाम को देवालयों, मंदिरों और पवित्र नदियों के तट पर दीपदान करने का विशेष महत्व है। ऐसा करने से घर के कष्ट दूर होते हैं और माता लक्ष्मी का वास होता है।

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