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नया शिक्षा सत्र शुरू हुए बीता एक माह, रेहटी सांदीपनी स्कूल के छात्र बस सुविधा से वंचित

20 से अधिक गांवों के बच्चे परेशान, प्राचार्य के पत्र के बाद भी जिला शिक्षा अधिकारी मौन, अभिभावकों में नाराजगी

सीहोर। रेहटी के सांदीपनी स्कूल में नया शिक्षा सत्र शुरू हुए एक महीने से अधिक का समय बीत चुका है, लेकिन प्रबंधन की लचर व्यवस्था के कारण आज भी सैकड़ों छात्र-छात्राएं स्कूल बस की सुविधा के लिए तरस रहे हैं। बसों के समुचित इंतजाम न होने से छात्र-छात्राओं की नियमित पढ़ाई बुरी तरह प्रभावित हो रही है, जिसे लेकर अब अभिभावकों में भी नाराजगी देखी जा रही है।
दरअसल स्कूल की नई बिल्डिंग शुरू होने के बाद इस सत्र में बड़ी संख्या में नए विद्यार्थियों ने स्कूल में प्रवेश लिया है। नियम और प्रावधानों के मुताबिक स्कूल प्रबंधन द्वारा 20 किलोमीटर के दायरे में आने वाले विद्यार्थियों को नि:शुल्क बस सुविधा देने का वादा किया गया था। लेकिन छात्रों की संख्या में भारी बढ़ोतरी होने के बावजूद बसों की संख्या नहीं बढ़ाई गई, जिससे पूरी परिवहन व्यवस्था चरमरा गई है।
20 से अधिक गांवों के बच्चे पैदल चलने को मजबूर
बस सुविधा के अभाव में सबसे ज्यादा परेशानी ग्रामीण क्षेत्र के बच्चों को उठानी पड़ रही है। क्षेत्र के पथोड़ा, मोगरा, बरखेड़ा, नदियाखेड़ा, झोलियापुर सहित लगभग 20 से अधिक गांवों के सैकड़ों छात्र-छात्राओं के सामने स्कूल आने-जाने का बड़ा संकट खड़ा हो गया है।
अनेक गरीब व मध्यमवर्गीय अभिभावक प्रतिदिन बच्चों के लिए निजी वाहनों ऑटो, वैन का खर्च उठाने में पूरी तरह असमर्थ हैं। नतीजा यह है कि छोटे-छोटे बच्चों को कई किलोमीटर की लंबी दूरी पैदल तय कर स्कूल पहुंचना पड़ रहा है। इससे न केवल उनकी पढ़ाई पर असर पड़ रहा है, बल्कि सुनसान रास्तों पर बच्चों की सुरक्षा को लेकर भी परिजनों को हर पल डर सताता रहता है।
ठेका कंपनियों की आपसी खींचतान में पिस रहे छात्र
बताया जा रहा है कि सांदीपनी स्कूल की बस संचालन का मुख्य ठेका समाया बस कंपनी के पास है। लेकिन कंपनी ने अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ते हुए यह कार्य किसी अन्य उप कंपनी को सौंप दिया है। यह नई कंपनी छात्रों की बढ़ी हुई संख्या के अनुपात में अतिरिक्त बसें उपलब्ध कराने को तैयार नहीं है। ठेकेदारों की इसी आपसी खींचतान और मनमानी का खामियाजा मासूम बच्चों को भुगतना पड़ रहा है।
15 दिन पहले लिखा पत्र, फिर भी कोई हरकत नहीं
बताया जा रहा है कि इस पूरे मामले में स्कूल प्रशासन की लाचारी भी सामने आई है। सांदीपनी स्कूल रेहटी के प्रभारी प्राचार्य महेश कुमार ने करीब 15 दिन पहले ही जिला शिक्षा अधिकारी शीलू शर्मा को लिखित में पत्र भेजकर बसों की भारी कमी और विद्यार्थियों को हो रही समस्याओं से अवगत कराया था। लेकिन विडंबना देखिए कि दो हफ्ते बीत जाने के बाद भी शिक्षा विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों ने मामले को गंभीरता से नहीं लिया। अब तक न तो अतिरिक्त बसों की व्यवस्था की गई है और ना ही ठेकेदार पर कोई कार्रवाई हुई है।

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