रुणिचा धाम में भक्ति की गंगा, गोवर्धन महाराज की झांकी और छप्पन भोग से महका पंडाल, आचार्य आनंद मोहन के भजनों पर झूमे श्रद्धालु

सीहोर। इछावर नगर के मुकातीपुरा स्थित दिव्य रुणिचा धाम इन दिनों आस्था और भक्ति का महाकुंभ बना हुआ है। यहां आयोजित संगीतमय श्रीमद्भागवत कथा के पांचवें दिन मुख्य आकर्षण गोवर्धन महाराज की मनोहारी झांकी, अलौकिक छप्पन भोग और भव्य महाआरती रही। इस धार्मिक अनुष्ठान में सैकड़ों की संख्या में श्रद्धालुओं की उपस्थिति से पूरा पंडाल खचाखच भरा नजर आया।

रुणिचा धाम में चल रही इस कथा की गूंज अब केवल सीहोर जिले तक सीमित नहीं रही है, बल्कि मध्यप्रदेश के अलग-अलग जिलों के साथ-साथ अन्य राज्यों से भी बड़ी संख्या में भक्त कथा का रसपान करने पहुंच रहे हैं। पूरा धाम प्रांगण मानो कृष्णमयी रंग में रंग चुका है। कथा व्यास पंडित आचार्य आनंद मोहन शुक्ला जी ने अपनी संगीतमय वाणी से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। जब उन्होंने ब्रजवासियों द्वारा की गई गोवर्धन पूजा और भगवान श्रीकृष्ण द्वारा इंद्रदेव के अहंकार मर्दन का प्रसंग सुनाया तो श्रद्धालु भक्ति भाव में डूब गए।
आचार्य जी ने जीवंत ढंग से वर्णन करते हुए बताया कि किस प्रकार भगवान श्रीकृष्ण ने ब्रजवासियों की रक्षा के लिए अपनी छोटी उंगली पर विशाल गोवर्धन पर्वत को धारण किया था। यह प्रसंग सुनते ही पूरा पंडाल गोवर्धन महाराज की जय और बांके बिहारी लाल की जय के जयकारों से गूंज उठा।
मनोहारी झांकी, छप्पन भोग और महाआरती
कथा पंडाल में गोवर्धन महाराज का भव्य झांकी सजाई गई थी, जिसकी श्रद्धालुओं ने पूजा अर्चना की। इसके बाद भगवान गोवर्धन को 56 प्रकार के विभिन्न व्यंजनों छप्पन भोग का महाभोग लगाया गया। कथा के विश्राम पर हुई भव्य महाआरती में जब दीपों की जगमगाहट, शंखनाद और जयकारे गूंजे तो माहौल पूरी तरह अलौकिक हो गया। आरती के पश्चात आयोजित विशाल भंडारे में दूर दराज से आए सैकड़ों श्रद्धालुओं ने महाप्रसाद ग्रहण कर धर्म लाभ उठाया।

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