
सीहोर। जिले की भेरूंदा तहसील के अंतर्गत आने वाले ग्राम कुमताल में सूचना का अधिकार (आरटीआई) कार्यकर्ता पर जानलेवा हमले का मामला सामने आया है। आरोप है कि ग्राम पंचायत में हुए कथित भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाने और आरटीआई के तहत जानकारी मांगने के कारण कार्यकर्ता को लगातार प्रताडि़त किया जा रहा था। इसी रंजिश के चलते बीते दिनों उन पर धारदार हथियारों और लाठियों से जानलेवा हमला किया गया। पीडि़त ने मंगलवार को जिला मुख्यालय पहुंचकर जनसुनवाई में कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक को शिकायती पत्र सौंपकर न्याय और सुरक्षा की गुहार लगाई है।
जानकारी के अनुसार ग्राम कुमताल निवासी आरटीआई कार्यकर्ता विजय मीना ने अपनी ग्राम पंचायत में विकास कार्यों में हुए कथित भ्रष्टाचार को उजागर करने के लिए आरटीआई दायर की थी। पीडि़त विजय मीना का आरोप है कि जैसे ही पंचायत प्रशासन को आरटीआई लगाने की भनक लगी, तभी से ग्राम पंचायत के सरपंच और रोजगार सहायक उन्हें लगातार धमकियां दे रहे थे और जानकारी वापस लेने का दबाव बना रहे थे।
जनसुनवाई के दौरान पंचायत भवन में हुआ विवाद
शिकायती पत्र में विजय मीना ने बताया कि विवाद 30 जून को तब और बढ़ गया जब पंचायत भवन में जनसुनवाई चल रही थी। विजय मीना अपनी समस्या लेकर वहां पहुंचे थे। उनका आरोप है कि वहां मौजूद रोजगार सहायक इमरत मीना ने उनके साथ गाली-गलौज शुरू कर दी और उन्हें जबरन पंचायत भवन से बाहर निकाल दिया।
तलवार, दराती और लाठियों से घेराबंदी कर पीटा
पीडि़त के अनुसार पंचायत भवन से बाहर निकलते ही रोजगार सहायक इमरत मीना्र उनके पुत्र आर्यन मीना, आनंद मीना, लोकेश मीना, हुकम सिंह मीना और इमरत मीना के भाई सुंदर लाल मीना ने घातक हथियारों के साथ उन पर हमला बोल दिया। हमलावरों के हाथों में तलवार, दराती, तगिया और लाठियां थीं्र जिससे उन्होंने विजय मीना की बेरहमी से पिटाई शुरू कर दी।
ग्रामीण नहीं होते तो चली जाती जान
पीडि़त विजय मीना ने आपबीती सुनाते हुए कहा हमला इतना अचानक और घातक था कि मुझे संभलने का मौका ही नहीं मिला। हमलावर मुझे जान से मारने की नीयत से आए थे। गनीमत रही कि मौके पर मौजूद गांव के अन्य लोगों ने हिम्मत दिखाई और बीच-बचाव किया। अगर ग्रामीण तत्परता से मुझे नहीं बचाते तो मेरी जान जा सकती थी।
कलेक्टर और एसपी से सुरक्षा की गुहार
घटना के बाद से पीडि़त और उनका परिवार खौफ के साए में है। मंगलवार को कलेक्टर कार्यालय पहुंचे पीडि़त ने दोषियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई करने्र रोजगार सहायक को पद से हटाने और खुद के लिए पुलिस सुरक्षा की मांग की है। प्रशासनिक अधिकारियों ने मामले की गंभीरता को देखते हुए उचित जांच और कार्रवाई का आश्वासन दिया है।