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प्रवेश पत्र या वसूली पत्र, कई निजी स्कूलों ने फीस के लिए बंधक बनाए छात्रों के रोल नंबर

बोर्ड परीक्षार्थी परेशान, कलेक्टर से हस्तक्षेप की गुहार

सीहोर। जिला मुख्यालय सहित पूरे अंचल में जहां एक ओर बोर्ड परीक्षाओं की उल्टी गिनती शुरू हो चुकी है, वहीं दूसरी ओर शिक्षा के मंदिरों ने वसूली केंद्रों का रूप अख्तियार कर लिया है। शहर के कई निजी स्कूलों ने बकाया फीस वसूलने के लिए छात्रों के प्रवेश पत्र को हथियार बना लिया है। आलम यह है कि जो छात्र इस समय किताबों के साथ परीक्षा की तैयारी में होने चाहिए थे, वे आज अपने माता-पिता के साथ स्कूलों के चक्कर काट रहे हैं और जिले के मुखिया कलेक्टर से हस्तक्षेप् की गुहार लगा रहे हैं कि साहब, कुछ कीजिए वरना हमारा साल बर्बाद हो जाएगा।
बता दें एक ओर जहां सक्षम परिवारों के बच्चे बिना किसी तनाव के रिवीजन और तैयारियों में जुटे हैं, वहीं दूसरी ओर आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चों के सामने बड़ा संकट खड़ा हो गया है। कई छात्रों का कहना है कि मण्डी हो, भोपाल नाका, गंज या शहर के किसी भी क्षेत्र का निजी स्कूल होए जिनमें एक या दो महीने की फीस बाकी है, लेकिन स्कूल प्रबंधन का रुख सख्त है और प्रवेश पत्र देने से पहले फीस जमा करने का दबाव बना रहा है। आलम यह है कि रोल नंबर न मिलने की वजह से छात्र अपनी पढ़ाई पर ध्यान केंद्रित नहीं कर पा रहे हैं। उन्हें डर है कि कहीं फस की वजह से उनका पूरा साल बर्बाद न हो जाए।
फीस वसूली का हथियार बना प्रवेश पत्र
विद्यार्थियों ने चर्चा के दौरान बताया कि स्कूल प्रबंधन द्वारा स्पष्ट कहा जा रहा है कि जब तक पूरी फीस जमा नहीं होगी, तब तक रोल नंबर नहीं दिया जाएगा। नियमत: स्कूल प्रबंधन किसी भी छात्र का प्रवेश पत्र नहीं रोक सकता, लेकिन सत्र के अंत में फीस वसूली के लिए इसे हथियार के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है। जिन बच्चों के माता-पिता मजदूरी या छोटे-मोटे काम करते हैं, उनके लिए एक साथ मोटी रकम जुटाना इस समय बड़ी चुनौती बना हुआ है।
कलेक्टर से लगाई न्याय की गुहार
अपनी इस व्यथा को लेकर कुछ परीक्षार्थियों ने जिले के सबसे बड़े मुखिया कलेक्टर से अपील की है। छात्रों का कहना है कि साहब, हम पढऩा चाहते हैं और परीक्षा देना चाहते हैं। हमारे माता-पिता जल्द ही फीस जमा कर देंगे, लेकिन स्कूल वाले रोल नंबर नहीं दे रहे हैं। कृपया आप आदेश जारी करें ताकि हमें समय पर प्रवेश पत्र मिल सके और हम बिना मानसिक तनाव के परीक्षा हॉल में बैठ सकें।
सप्ताह भर का समयए बढ़ रहा है दबाव
गौरतलब है कि परीक्षा शुरू होने में अब गिनती के दिन बचे हैं। ऐसे में रोल नंबर का वितरण जल्द होना अनिवार्य है ताकि छात्र अपना परीक्षा केंद्र देख सकें और आवश्यक तैयारी कर सकें। अब देखना यह है कि प्रशासन इन मासूमों की गुहार पर क्या सख्त कदम उठाता है, ताकि शिक्षा के अधिकार और छात्रों के भविष्य के बीच में ‘पैसा’ रोड़ा न बने।

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