
सीहोर। कभी सीहोर शहर की धडक़न और बच्चों के मुख्य आकर्षण का केंद्र रहा सुंदर वन पार्क आज राजनीतिक और प्रशासनिक अनदेखी के कारण अपनी बदहाली पर आंसू बहा रहा है। जब सामाजिक संगठन सीवन पुत्र की टीम सुंदर वन परिसर का निरीक्षण करने पहुंची तो वहां मौजूद बच्चों के मासूम सवालों ने व्यवस्थाओं को कटघरे में खड़ा कर दिया। वहां आए बच्चे अथर्व और नितिन ने सीधा सवाल पूछा 36 वर्षों में कहां खो गया हमारा सुंदर वन और इसकी वापसी कब होगी। हमें यहां मचान, नौकायन, झूले और पशु-पक्षी कब देखने को मिलेंगे।
सीवन पुत्र टीम ने वहां मौजूद नई पीढ़ी के बच्चों को सुंदर वन के सुनहरे और गौरवशाली इतिहास से रूबरू कराया। टीम ने बताया कि वर्ष 1990 में इस सुंदर वन का उद्घाटन हुआ था। करीब साढ़े तीन दशक पहले यह जगह इतनी जीवंत थी कि लोग दूर-दूर से यहां वक्त बिताने आते थे। यहां सुंदर मचान थे, बोटिंग होती थी, बच्चे झूले और फिसलपट्टी पर खेलते थे। परिसर रंग-बिरंगे फूलों और औषधीय पौधों से महकता था। विभिन्न प्रकार के पशु-पक्षियों के साथ साथ जलाशय में मगरमच्छ तैरते थे। सबसे बड़ा आकर्षण सीवन नदी के ऊपर बना लकड़ी का पुल था, जो लोगों को अपनी ओर खींचता था।
कचरे और शराब की बोतलों का अड्डा बना सुंदरवन
36 वर्षों के लंबे अंतराल और लगातार राजनीतिक और प्रशासनिक उदासीनता के कारण आज यह पूरा पर्यटन परिसर उजाड़ हो चुका है। सीवन पुत्र प्रदीप चावड़ा ने दुख व्यक्त करते हुए कहा कि सुंदर वन बच्चों की मस्ती और हर आम आदमी के सुकून का ठिकाना था। लेकिन आज यहां का वैभव पूरी तरह नष्ट हो चुका है। अब यहां हरियाली और पक्षियों की चहचहाहट की जगह केवल पॉलीथिन, कचरा, शराब की खाली बोतलें और सिगरेट के पैकेट बिखरे नजर आते हैं। उन्होंने कहा कि यदि इसे दोबारा विकसित किया जाए तो यह सीहोर के पर्यटन में मील का पत्थर साबित होगा। जिस तरह हमारी टीम सीवन नदी के उद्धार के लिए संकल्पित है, वैसे ही सुंदर वन को बचाने के लिए भी प्रतिबद्ध है।
यादों को किया ताजा, बयां किया दर्द
दौरे के दौरान सीवन पुत्र कैलाश चव्हाण ने सुंदर वन के इतिहास से अनजान बच्चों और बड़ों को पुरानी तस्वीरें बयां करते हुए बताया कि कहां पर क्या व्यवस्थाएं थीं। भोपाल से आए गुना निवासी अमित ने बताया कि 15 साल पहले तक यहां की दशा फिर भी ठीक थी, लेकिन अब यह पूरी तरह उजड़ चुका है। स्थानीय नागरिक शेखर राय ने कहा कि इस उजड़े हुए स्वरूप को देखकर बड़ा दुख होता है, लेकिन जिम्मेदार मौन हैं। वरिष्ठ नागरिक सुरेश भगत ने कहा कि यदि प्रशासन और आम जनता जागरूक रहती तो आज इस पार्क में वन्यजीव भी देखने को मिल सकते थे। वहीं लक्ष्मण चौकसे एवं योगेंद्र राय ने शासन, जिला प्रशासन और नगर पालिका से इस वन को पुनर्जीवित करने हेतु बजट स्वीकृत करने की मांग की।
सुंदर वन के जीर्णोद्धार के लिए उठी आवाज
सीवन टीम के इस दौरे का मुख्य उद्देश्य सुंदर वन के जीर्णोद्धार की मांग को एक बार फिर से जिंदा करना है। अब सीहोर के नागरिकों और बच्चों की सिस्टम से एक ही पुकार है कि वे अपनी कुंभकर्णी नींद से जागें, जरूरी फंड जारी करें और सुंदर वन को उसका पुराना स्वरूप लौटाएं ताकि बच्चों को उनका खोया हुआ बचपन और पर्यटन स्थल वापस मिल सके।