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बिजौरी में अघोषित बिजली कटौती पर फूटा गुस्सा, भीषण गर्मी में सडक़ों पर उतरे ग्रामीण, कंपनी के खिलाफ बोला हल्ला

दिन-रात ट्रिपिंग से लोग बेहाल, मोटर-पंप ठप होने से गहराया पेयजल संकट, ग्रामीणों ने दी उग्र आंदोलन की चेतावनी

सीहोर। जिले के ग्राम बिजौरी में अघोषित बिजली कटौती और लगातार हो रही ट्रिपिंग से परेशान ग्रामीणों के सब्र का बांध आखिरकार टूट गया। नौतपा की इस भीषण गर्मी और चिलचिलाती धूप के बीच बिजली की जारी आंख-मिचौली से नाराज ग्रामीण मंगलवार को लामबंद होकर सडक़ों पर उतर आए। ग्रामीणों ने विद्युत वितरण कंपनी के खिलाफ जमकर नारेबाजी करते हुए उग्र प्रदर्शन किया और व्यवस्था सुधारने की मांग की।
प्रदर्शन कर रहे ग्रामीणों ने बिजली कंपनी पर मनमानी का आरोप लगाते हुए कहा कि गांव में दिन हो या रात, बिजली कब चली जाए और कब आएगी, इसका कोई तय समय नहीं रह गया है। अघोषित रूप से घंटों बिजली गुल रहने के कारण लोगों की दिनचर्या पूरी तरह पटरी से उतर चुकी है। उमस और भीषण गर्मी के कारण लोग रात में ठीक से सो भी नहीं पा रहे हैं, जिसके चलते बुजुर्गए बच्चे और बीमार लोग सबसे ज्यादा तड़पने को मजबूर हैं। वहीं दिन के समय बिजली न रहने से ग्रामीणों के खेती.किसानी और व्यापार से जुड़े जरूरी काम भी पूरी तरह ठप हो गए हैं।
बिजली गायब होने से गांव में खड़ा हुआ जल संकट
ग्रामीणों ने एक और बड़ी समस्या को रेखांकित करते हुए बताया कि लगातार हो रही कटौती के कारण गांव में अब पेयजल संकट भी गहरा गया है। बिजली न रहने से पानी की मोटरें और शासकीय पंप नहीं चल पा रहे हैं, जिससे पूरे गांव में पानी के लिए हाहाकार मचा हुआ है। लोगों को दूर-दराज से पानी ढोने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। इसके साथ ही अघोषित कटौती के कारण छात्र-छात्राओं की पढ़ाई भी पूरी तरह प्रभावित हो रही है।
बिल वसूली में नंबर वन, तो 24 घंटे सप्लाई के दावे हवाई क्यों
ग्रामीणों ने बिजली कंपनी की कार्यप्रणाली पर तीखे सवाल उठाते हुए कहा कि विभाग समय पर भारी-भरकम बिल वसूलने और वसूली ड्राइव चलाने में तो कोई ढिलाई नहीं बरतता, फिर उपभोक्ताओं को निर्बाध बिजली देने के समय हाथ क्यों खड़े कर लेता है। ग्रामीणों का सीधा आरोप है कि सरकार और विभाग के 24 घंटे निर्बाध बिजली सप्लाई के बड़े बड़े दावे सिर्फ कागजों और विज्ञापनों तक ही सीमित हैं, जमीनी हकीकत इसके बिल्कुल उलट है।
सुनवाई न होने पर दी उग्र आंदोलन की चेतावनी
ग्रामीणों का कहना है कि बिजली की इस बदहाली को लेकर स्थानीय स्तर पर कई बार बिजली कंपनी के अधिकारियों और कर्मचारियों को शिकायत दर्ज कराई गई है। लेकिन जिम्मेदार अधिकारी हर बार सिर्फ खोखला आश्वासन देकर मामले को टाल देते हैं, जिससे विभाग की लापरवाही साफ उजागर होती है। ग्रामीणों ने दोटूक शब्दों में जिला प्रशासन और बिजली कंपनी को चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही अघोषित कटौती और ट्रिपिंग की समस्या का स्थायी समाधान नहीं किया गया तो पूरा गांव मिलकर उग्र आंदोलन और चक्काजाम करने के लिए बाध्य होगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।

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