सीहोर में रह रहे बांग्लादेशी नागरिक को 7 वर्ष की सजा, 10 हजार का अर्थदंड

सीहोर। नगर में बिना वीजा एवं पासपोर्ट के रहने वाले एक बांग्लादेशी नागरिक को प्रथम अपर सत्र न्यायाधीश ने 7 वर्ष का सश्रम कारावास एवं 10 हजार के अर्थदण्ड की सजा सुनाई है। इस मामले की पैरवी अपर लोक अभियोजक रेखा चौरसिया द्वारा की गई थी। न्यायालय ने बांग्लादेशी नागरिक मोहम्म्द इरशाद पिता मोहम्मद सिराज आयु 44 वर्ष निवासी इंदिरा नगर टप्पर जिला सीहोर को सजा सुनाई है।
जानकारी के अनुसार पुलिस थाना कोतवाली में मुखबिर से सूचना प्राप्त हुई थी कि इंदिरा नगर टप्पर सीहोर में इरशाद नामक बांग्लादेशी नागरिक रह रहा है। इस सूचना के बाद वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देशन में थाना कोतवाली पुलिस टीम इंद्रा नगर टप्पर सीहोर स्थित मोहम्मद इरशाद के घर पहुंची। पूछताछ पर इरशाद ने बताया कि वह 15 वर्ष की आयु में बांग्लादेश से अजमेर राजस्थान आकर रहने लगा। वहां पर करीब 15 साल काम करने के बाद सीहोर आ गया। यहां पर करीब 5-6 साल से निवासरत है। पुलिस टीम ने जब पासपोर्ट, वीजा मांगा तो वह कुछ नहीं दिखा पाया। नागरिकता के लिए आवेदन भी नहीं किया। पुलिस टीम ने इरशाद द्वारा प्रस्तुत दस्तावेज के आधार पर उसके बांग्लादेश के जन्म प्रमाण पत्र, माता-पिता के पहचान पत्र की छायाप्रतियां, जो बांग्ल भाषा में थी, जिन्हें बांग्ला भाषा के विषेषज्ञ लालमोहन हलदार को बुलवाकर अनुवाद करवाया गया और ये दस्तावेज बांग्लादेश के पाए गए। पुलिस ने मो. इरशाद से सभी दस्तावेज जप्त कर इरशाद को गिरफ्तार कर लिया। थाना कोतवाली पुलिस ने अभियुक्त के विरुद्ध अपराध 319/2025 की धारा 14-ए, 14-बी विदेशियों विषयक अधिनियम, 1946 की एफआईआर दर्ज की।
पुलिस ने दस्तावेज जप्त कर जांच के लिए भेजे –
पुलिस जांच के दौरान जांचकर्ता अधिकारी एसआई विक्रम आदर्श द्वारा अभियुक्त से पूछताछ कर उसके द्वारा दी गई जानकारी के आधार पर उसका मोबाइल, आधार कार्ड, पेन कार्ड सहित समग्र आईडी जो सीहोर जिले के ही बने हुए थे, भी जप्त किए गए। सभी दस्तावेजों को जप्त करने के बाद संबंधित विभाग से इनकी जानकारी लेकर अभियुक्त के मोबाइल को साइबर फोरेंसिक लैब भोपाल जाँच के लिए भिजवाया गया और अवशेष विवेचना कर अभियुक्त का बांग्लादेश का नागरिक होकर बिना विधिक दस्तावेज के भारत आने और रहने के कारण उसके विरुद्ध अभियोग पत्र न्यायालय मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट सीहोर के समक्ष प्रस्तुत किया गया, जो आर.सी.टी. नंबर 528/2025 पर दर्ज होकर अभियोजन साक्ष्य स्तर पर अंतरण पर शिवानी श्रीवास्तव, न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी सीहोर के न्यायालय को प्राप्त हुआ। इस मामले में सुनवाई के दौरान 6 फरवरी 2026 के आदेश द्वारा पंजीबद्ध अपराध 8 वर्ष तक के कारावास से दण्डनीय होकर सत्र विचारणीय होने के आधार पर उसे उपार्पित किया। इस मामले में अभियोजन द्वारा प्रस्तुत साक्ष्य एवं तर्कों से सहमत होते हुए न्यायालय द्वारा आरोपी मोहम्मद इरशाद पिता मोहम्मद सिराज को धारा 14-क विदेशीयों विषयक अधिनियम 1946 में दोषी पाते हुए 7 वर्ष का सश्रम कारावास एवं 10 हजार रुपए के अर्थदण्ड से दण्डित किया गया।



