ईष्र्या छोड़ें, जीवन में खुद ब खुद आ जाएगी शांति: ज्ञानवर्धन स्वामी
तीन दिवसीय परायण के अंतिम दिन स्वामीजी ने बताया अशांति का मुख्य कारण

सीहोर। मनुष्य के जीवन में आज व्याप्त अशांति का सबसे बड़ा और मुख्य कारण ईष्र्या है। यदि मनुष्य अपने जीवन से ईष्र्या का भाव पूरी तरह त्याग दे तो उसका जीवन केवल और केवल परम शांति से भर जाएगा। लेकिन मन से ईष्र्या को समाप्त करने का एक ही सबसे सुलभ और सच्चा साधन है, संत-महात्माओं का सानिध्य और सरल जीवन शैली।
यह उद्गार स्वामीनारायण मंदिर में आयोजित तीन दिवसीय विशेष आध्यात्मिक परायण के अंतिम दिन श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए ज्ञानवर्धन स्वामी ने व्यक्त किए। धार्मिक वातावरण के बीच तीन दिनों से चल रहे इस आध्यात्मिक समागम का रविवार को समापन हुआ।

ईष्र्या से मुक्ति का मार्ग है सत्संग
प्रवचन में ज्ञानवर्धन स्वामीजी ने कहा कि आज के आधुनिक दौर में व्यक्ति अपनी सुख-सुविधाओं से उतना दुखी नहीं है, जितना वह दूसरों की उन्नति देखकर ईष्र्या महसूस करता है। यही ईष्र्या मनुष्य के मन की शांति छीन लेती है और उसे मानसिक तनाव की ओर धकेलती है। उन्होंने कहा कि संतों के विचारों को अपने जीवन में उतारकर और सरल भाव अपनाकर ही मनुष्य इस नकारात्मक भावना पर विजय प्राप्त कर सकता है।
सत्संग ही मानव कल्याण का एकमात्र रास्ता
कार्यक्रम का संचालन करते हुए विनय स्वामी एवं विमल स्वामी दासजी ने कहा कि मानव जीवन का वास्तविक उद्देश्य केवल भौतिक प्रगति करना नहीं, बल्कि आत्मिक उन्नति और शांति प्राप्त करना है। उन्होंने जोर देकर कहा कि मनुष्य जीवन को कल्याणकारी बनाने और सच्चे सुख की अनुभूति के लिए सत्संग ही एकमात्र मार्ग है, जो मनुष्य नियमित रूप से प्रभु भक्ति और सत्संग से जुड़ता है, उसका जीवन अपने आप मंगलमय हो जाता है। तीन दिवसीय परायण के समापन अवसर पर स्वामीनारायण मंदिर प्रांगण श्रद्धालुओं से खचाखच भरा रहा। कार्यक्रम के अंत में भगवान स्वामीनारायण की महाआरती उतारी गई और महाप्रसाद का वितरण किया गया। इस अवसर पर दक्षेश पटेल, जयसिंह, इमरतसिंह राजा, अशोक पटेल, डॉ. अशोक पिचोनिया सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।



