दावों में जल गंगा संवर्धन अभियान, हकीकत में प्यासा ही रह गया सीहोर

सीहोर। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में प्रदेशभर के साथ जिले में 19 मार्च से 30 जून तक जल गंगा संवर्धन अभियान चलाया गया। जिला प्रशासन और कलेक्टर बालागुरु के. इस अभियान को लेकर लक्ष्य से अधिक काम करने और इसे जन आंदोलन बनाने के बड़े-बड़े दावे कर रहे हैं। वन विभाग द्वारा 2555 चेक डैम और 24130 मीटर कंटूर ट्रेंच बनाने जैसे भारी-भरकम आंकड़े पेश किए जा रहे हैं, लेकिन जब जिला मुख्यालय की जमीनी हकीकत टटोली गई तो इस अभियान के दावों की हवा निकलती नजर आ रही है। शहर की प्यास बुझाने वाले मुख्य स्रोत आज भी उपेक्षा का शिकार हैं।
अभियान की सबसे बड़ी नाकामी जिला मुख्यालय पर बहती जीवनदायिनी सीवन नदी में देखने को मिल रही है। सीवन नदी के संवर्धन और सौंदर्यीकरण के नाम पर जो निर्माण कार्य चल रहे हैं, उनमें भारी भ्रष्टाचार और घटिया निर्माण के आरोप लग रहे हैं। काम की गुणवत्ता इतनी खराब है कि खुद नगर पालिका प्रशासन को इस मामले में ठेकेदार को तीन बार नोटिस जारी करने पड़े हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि जिस अभियान का मकसद जल स्रोतों को जीवन देना था, वह भ्रष्टाचार की भेंट कैसे चढ़ गया।
जमोनिया तालाब अछूता, कुओं की सफाई का अता-पता नहीं
शहर की आधी से ज्यादा आबादी की प्यास बुझाने वाले ऐतिहासिक जमोनिया तालाब तक इस पूरे अभियान के दौरान प्रशासन की नजरें नहीं पड़ सकी। जल गंगा संवर्धन अभियान जमोनिया तालाब की सुध लिए बिना ही समाप्त हो गया। इसके अलावा जिला मुख्यालय पर 100 से अधिक पारंपरिक कुएं और बावडिय़ां मौजूद हैं, जिनमें से कितनों की वास्तव में सफाई हुई और कितनों का जीर्णोद्धार हुआ, प्रशासनिक आंकड़ों में इसका कोई स्पष्ट उल्लेख नहीं है।
हर विभाग ने गिनवाईं उपलब्धियां
एक तरफ जहां जमीनी स्तर पर शहर के मुख्य जल स्रोत बदहाल हैं, वहीं दूसरी तरफ सरकारी महकमे आंकड़ों की बाजीगरी में जुटे हैं। वन विभाग के अनुसार 2555 चेक डैम, 10 तालाब और 24 हजार मीटर कंटूर ट्रेंच बनाने का दावा कर रहा है तो स्कूल शिक्षा विभाग 260 स्कूलों में सिर्फ टंकियां साफ करवाकर औपचारिकता पूरी कर चुका है। पीएचई विभाग ने स्कूलों-आंगनबाडिय़ों में जल परीक्षण का दावा किया है। वहीं नगरीय निकायों ने 233 रेन वाटर हार्वेस्टिंग और अमृत योजना के तहत 3337 नल कनेक्शन देने की बात कही है, लेकिन शहर में आज भी कई इलाके पानी की बूंद-बूंद को तरस रहे हैं। महिला बाल विकास ने 72 पोषण वाटिका और कृषि विभाग ने 6 बलराम तालाबों का राग अलापा है।
मूल समस्या जस की तस
प्रशासनिक रिपोर्ट के मुताबिक अभियान के दौरान 113 वृक्ष पूजन, 107 जल स्रोत पूजन, 168 जल चौपाल, 82 कलश यात्राएं और 53 भजन संध्याएं आयोजित की गईं। नागरिकों का कहना है कि प्रशासन का पूरा ध्यान जल संरक्षण के जमीनी काम करने के बजाय रैलियों, आयोजनों, फोटो खिंचवाने और ढोल-नगाड़े बजाने पर ज्यादा रहा। यही वजह है कि 19 मार्च से शुरू हुआ यह साढ़े तीन महीने का लंबा अभियान खत्म तो हो गया, लेकिन जिला मुख्यालय की सीवन नदी और जल संकट की स्थिति जस की तस बनी हुई है।

Exit mobile version