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मत्स्य विभाग की उदासीनता से अधूरा सीएम डॉ. यादव का पांचवां निर्देश

सीहोर जिले में 4 फैसलों पर मुस्तैदी से हुआ अमल, लेकिन खुले में मांस-मछली बिक्री पर बैन का आदेश विभाग की सुस्ती से साबित हो रहा बेअसर

सीहोर। 13 दिसंबर 2023 को मुख्यमंत्री पद की शपथ लेते ही डॉ. मोहन यादव ने जनहित और कानून-व्यवस्था को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से 5 प्रमुख निर्देश जारी किए थे। जिला प्रशासन ने इन 5 में से 4 निर्देशों को तो जिले में तत्परता से लागू कर दिया, लेकिन मत्स्य विभाग की भारी सुस्ती और उदासीनता के कारण पांचवां प्रमुख निर्देश आज तक बेअसर और अधूरा पड़ा हुआ है।
क्या थे सीएम डॉ. यादव के 5 फैसले और सीहोर में स्थिति
– धार्मिक और सार्वजनिक स्थलों पर निर्धारित ध्वनि सीमा से अधिक तेज आवाज में लाउडस्पीकर बजाने पर रोक। जिले में अमल जारी।
– शासकीय महाविद्यालयों को पीएम एक्सीलेंस कॉलेज के रूप में उन्नत कर बेहतर सुविधाएं देना। जिले में काम पूर्ण।
– आदतन अपराधियों की जमानत निरस्त कराने और सुरक्षा सख्त करने हेतु पुलिस की कॉम्बिंग गश्त। पुलिस-प्रशासन की सख्ती जारी।
– पुलिस और राजस्व विभाग के रिकॉड्र्स का त्वरित और सुरक्षित डिजिटल रखरखाव। जिले में अमल पूरा।
– खुले में बिकने वाले मांस और मछली की बिक्री पर पूरी तरह से पाबंदी लगाना, ताकि शाकाहारी नागरिकों और आम राहगीरों को आवाजाही में कोई परेशानी न हो। मत्स्य विभाग की ढिलाई से यही निर्देश अधूरा है।

राशि जारी होने के बाद भी जीरो काम
खुले में मछली की बिक्री बंद कराने और दुकानदारों को व्यवस्थित स्थान देने के लिए प्रदेश स्तर पर शहरी व ग्रामीण क्षेत्रों में स्मार्ट फिश पार्लर योजना शुरू की गई थी। विडंबना यह है कि जिला मत्स्य विभाग को योजना के तहत राशि जारी कर दी गई है, फिर भी जिले भर में आज तक एक भी फिश पार्लर बनकर तैयार नहीं हो सका। सभी प्रस्तावित निर्माण कार्य कागजों और आधे-अधूरे ढांचों में अटके पड़े हैं, जिसके कारण आज भी सडक़ों के किनारे और बाजारों में खुलेआम मछलियां बेची जा रही हैं।
बैठकों में मॉनीटरिंग का दावा, लेकिन धरातल पर सब ठप
मामले में जिला मत्स्य अधिकारी प्रशांत हर्ष का कहना है कि योजना को लेकर समय-समय पर जिला मुख्यालय में आयोजित टीएल बैठकों में कलेक्टर स्वयं मॉनीटरिंग करते हैं, वहीं विभाग के प्रमुख सचिव भी इसकी लगातार समीक्षा कर रहे हैं।
अब सबसे बड़ा सवाल यही उठता है कि जब कलेक्टर से लेकर प्रमुख सचिव स्तर के शीर्ष अधिकारी खुद योजना पर नजर बनाए हुए हैं, तो फिर जमीनी स्तर पर मत्स्य विभाग के अधिकारी-कर्मचारी इतने बेपरवाह कैसे हैं। राशि मिलने के बावजूद एक भी फिश पार्लर तैयार न होना प्रशासनिक कार्यप्रणाली और विभाग की मंशा पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।

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