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कुबेरेश्वरधाम पर जरूरतमंद बच्चों को बांटी शिक्षा सामग्री, पं. प्रदीप मिश्रा बोले शिक्षा का दान ही सबसे बड़ी शिव सेवा

सीहोर। जरूरतमंद की सहायता करना ही सच्ची शिव सेवा है और शिक्षा का दान संसार में सबसे बड़ा दान है। शिक्षा से केवल एक व्यक्ति नहीं, बल्कि पूरा समाज सशक्त और समृद्ध बनता है। यदि हम समर्थ हैं, तो हमें ऐसे कार्य करने चाहिए जिससे दूसरों के जीवन का अंधकार और अज्ञानता दूर हो सके।
यह विचार कथावाचक पंडित प्रदीप मिश्रा ने जिला मुख्यालय स्थित कुबेरेश्वरधाम पर व्यक्त किए। धाम पर नियमित रूप से चलने वाले सेवा कार्यों के सिलसिले को आगे बढ़ाते हुए मंगलवार को पंडित मिश्रा के सानिध्य में जरूरतमंद और छोटे-छोटे विद्यार्थियों को नि:शुल्क शिक्षा सामग्री का वितरण किया गया। सामग्री पाकर बच्चों के चेहरे खुशी से खिल उठे। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में श्रद्धालु, सामाजिक कार्यकर्ता और स्थानीय नागरिक मौजूद रहे।
कुबेरेश्वरधाम में आयोजित इस सेवा कार्यक्रम में विठ्ठलशरण सेवा समिति की ओर से पंडित विनय मिश्राए पंडित समीर शुक्ला सहित अन्य सेवादारों ने सामाजिक सरोकार निभाते हुए बच्चों को कॉपी, किताबें, स्कूल बैग, पेन, पेंसिल और अन्य आवश्यक शैक्षणिक सामग्रियां प्रदान कीं। इस दौरान बच्चों के अभिभावकों ने कहा कि ऐसे प्रयास गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों के बच्चों के लिए बेहद मददगार और प्रेरणादायक साबित होते हैं।
भोजन, पेयजल और अन्य सेवा कार्य भी जारी
विठ्ठलशरण सेवा समिति के मीडिया प्रभारी मनोज दीक्षित ने बताया कि गुरुदेव पंडित प्रदीप मिश्रा के मार्गदर्शन में कुबेरेश्वरधाम आने वाले सभी श्रद्धालुओं के लिए समिति की ओर से प्रतिदिन नि:शुल्क भोजन प्रसादी और शुद्ध पेयजल सहित अन्य बुनियादी व्यवस्थाएं की जाती हैं। इसके साथ ही सामाजिक और जनहित के कार्य भी लगातार जारी रहते हैं। मंगलवार सुबह पंडित श्री मिश्रा ने खुद भोजनशाला पहुंचकर श्रद्धालुओं को प्रसादी का वितरण भी किया।
सक्षम लोग जिम्मेदारी समझें, कोई बच्चा पढ़ाई से वंचित न रहे
उपस्थित सामाजिक संगठनों और समाजसेवियों को संबोधित करते हुए पंडित प्रदीप मिश्रा ने कहा कि शिक्षा ही वह शक्ति है जो जीवन को नई दिशा देती है। समाज के हर सक्षम व्यक्ति का यह दायित्व है कि वह आर्थिक रूप से कमजोर बच्चों की पढ़ाई में मदद करे, ताकि कोई भी बच्चा पैसों के अभाव में अशिक्षित न रहे। उन्होंने संदेश दिया कि भगवान शिव की सच्ची भक्ति केवल मंदिरों में पूजा-अर्चना तक सीमित नहीं हैए बल्कि असहाय और जरूरतमंदों की नि:स्वार्थ सेवा करना भी शिव आराधना का ही एक रूप है।

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