
सीहोर। जिले के भेरूंदा तहसील अंतर्गत एक गांव में जमीन के पट्टे की लिखा-पढ़ी को लेकर उपजे मामूली विवाद ने खूनी संघर्ष का रूप ले लिया। मंगलवार रात को घर में खाना खा रहे 50 वर्षीय किसान पर कुछ लोगों ने लाठी-डंडों और तलवारों से जानलेवा हमला कर दिया। इस भीषण हमले में गंभीर रूप से घायल किसान ने बुधवार सुबह भोपाल के हमीदिया अस्पताल में इलाज के दौरान दम तोड़ दिया।
मृतक के परिजनों के अनुसार मंगलवार रात परिवार अपने घर पर मौजूद था और 50 वर्षीय किसान रामद्वार मेहर पुत्र बलराम प्रसाद खाना खा रहे थे, तभी संतोष, उसका बेटा रितेश, बलराम और दुर्गेश समेत अन्य लोग वहां लाठी-डंडों और तलवारों से लैस होकर पहुंच गए। हमलावरों ने घर में घुसकर रामद्वार मेहर पर ताबड़तोड़ हमला कर दिया, जिससे उन्हें संभलने तक का मौका नहीं मिला। जब बीच-बचाव करने परिवार के अन्य सदस्य आगे आए तो हमलावरों ने उन्हें भी नहीं बख्शा और उनके साथ भी मारपीट की तथा घर में जमकर तोडफ़ोड़ की।
पट्टे की लिखा-पढ़ी को लेकर शुरू हुआ था विवाद
मृतक के बेटे अरुण ने पूरी घटना की जानकारी देते हुए बताया कि गांव में इन दिनों जमीन के पट्टे बनाने का काम चल रहा है। पिछले दिनों 26 अक्टूबर को पटवारी गांव आए थे और जमीन के पट्टे के लिए लिखा-पढ़ी की जा रही थी। इसी दौरान वहां मौजूद संतोष के साथ धक्का लगने की बात को लेकर मामूली विवाद शुरू हो गया था।
अरुण का कहना है कि संतोष उम्र में उनसे बड़ा था, इसलिए उन्होंने सम्मान देते हुए विवाद को आगे नहीं बढ़ाया और वहां से घर चले आए। इसके बाद उन्होंने अपने पिता रामद्वार को इस बात की जानकारी दी, जिन्होंने बाद में संतोष को समझा दिया था। परिजनों का आरोप है कि इसी बात की रंजिश रखते हुए आरोपियों ने तीन दिन बाद मंगलवार की रात उनके घर पर यह खूनी हमला बोल दिया।
बेटे का कटा कान, 4 साल की मासूम का टूटा पैर
इस हमले में परिवार के कई सदस्य गंभीर रूप से घायल हुए हैं। मृतक के बेटे अरुण का एक कान कट गया, जबकि उनकी चार साल की मासूम बेटी का पैर टूट गया। इसके अलावा हमले में रामद्वार की पत्नी और बेटी को भी गंभीर चोटें आई हैं। सिर पर गंभीर चोट लगने के कारण रामद्वार मेहर को तुरंत बेहतर इलाज के लिए भोपाल के हमीदिया अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां बुधवार सुबह उन्होंने दम तोड़ दिया।
पुलिस चौकी पर मदद नहीं मिलने का आरोप
घटना के बाद पीडि़त परिवार ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। बेटे अरुण का आरोप है कि हमले के तुरंत बाद वह दौडक़र गांव के पास स्थित लाडक़ुई पुलिस चौकी गए थे और पुलिस को सूचना दी थी। उस वक्त हमलावर उनके घर में तांडव मचा रहे थे। अरुण के मुताबिक चौकी पर करीब पांच पुलिसकर्मी मौजूद थे, लेकिन उन्होंने मौके पर मदद भेजने के बजाय उन्हें भेरूंदा थाने जाकर शिकायत करने की सलाह दी। परिजनों का कहना है कि यदि पुलिस ने समय रहते सक्रियता दिखाई होती और मौके पर पहुँचती तो शायद किसान की जान बचाई जा सकती थी। इधर लाडक़ुई चौकी प्रभारी राजेश यादव का कहना है कि मामले की जांच की जा रही है।