
सीहोर। विद्युत कंपनी की घोर लापरवाही ने जहां एक तरफ एक हंसते-खेलते किसान को जिंदगी भर के लिए अपाहिज बना दिया, वहीं अब विभाग अपनी गर्दन बचाने के लिए गुंडागर्दी और डराने-धमकाने पर उतारू हो गया है। ग्राम बड़बेली में बिजली के झूलते तारों की चपेट में आने से गंभीर रूप से घायल किसान सतीश मेवाड़ा को न्याय दिलाने के लिए शुक्रवार को दर्जनों गांवों के सैकड़ों किसान भारी बारिश में भीगते हुए कलेक्ट्रेट पहुंच और धरना प्रदर्शन किया। इसी बीच दो अन्य किसानों ने बिजली विभाग के अफसरों पर डरा धमकाकर कोरे कागजों पर जबरन दस्तखत कराने का आरोप लगाया है।
ग्राम सेमरा दांगी के किसान राकेश वर्मा और अशोक वर्मा ने विद्युत वितरण केंद्र खजूरिया कलां के अधिकारियों और कर्मचारियों पर बेहद गंभीर आरोप लगाए हैं। दोनों किसानों ने शपथपत्र और नोटरी के माध्यम से कलेक्टर, एसडीएम, एसपी और विद्युत मंडल के अधीक्षण यंत्री को शिकायत सौंपी है। उन्होंने बताया कि 18 जून को ग्राम बड़बेली में जब करंट लगने का यह हादसा हुआ वे मौके पर नहीं थे। इसके बावजूद 30 जून को विभाग के अफसरों और लाइनमैन ने उन्हें अलग-अलग जगहों पर बुलाया। आरोप है कि उन्हें बिजली चोरी और अन्य झूठे मुकदमों में फंसाने की धमकी दी गई और जबरन कोरे कागजों पर हस्ताक्षर करा लिए गए ताकि विभाग अपनी लापरवाही छिपाने के लिए झूठा पंचनामा तैयार कर सके। पीडि़तों ने इन हस्ताक्षरों को अमान्य घोषित कर दोषी बिजली कर्मियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है।
जिंदगी और मौत से जंग लड़ रहा पीडि़त
हादसे का शिकार हुए ग्राम बड़बेली निवासी किसान सतीश मेवाड़ा की हालत बेहद चिंताजनक बनी हुई है। 18 जून को वे अपने खेत में ट्रैक्टर से कृषि कार्य कर रहे थे। इसी दौरान खेत के ऊपर से गुजर रही 11 केवी की हाईटेंशन लाइन जो लंबे समय से जमीन से महज 5 फीट ऊपर झूल रही थी, उसकी चपेट में आ गए। करंट इतना भयानक था कि सतीश गंभीर रूप से झुलस गया और इलाज के दौरान डॉक्टरों को उसका एक हाथ काटना पड़ा, जबकि एक पैर भी बुरी तरह प्रभावित हुआ है। ग्रामीणों का कहना है कि खंभे लंबे समय से टेढ़े थे, कई बार शिकायत की गई लेकिन विभाग सोया रहा।
बारिश में भीगते हुए किसानों ने दिया धरना
हादसे के 15 दिन बीत जाने के बाद भी जब तहसील श्यामपुर और थाना दोराहा पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की तो किसान नेता एमएस मेवाड़ा के नेतृत्व में बड़बेली, चंदेरी, रातीखेड़ा, बिलकिसगंज सहित दर्जनों गांवों के सैकड़ों किसान बारिश के बीच कलेक्ट्रेट पहुंच गए। किसानों ने नारेबाजी करते हुए अफसरों को सौंपकर मांग की कि घायल किसान सतीश मेवाड़ा के संपूर्ण इलाज का शत प्रतिशत खर्च विद्युत विभाग उठाए। पीडि़त परिवार को तुरंत 25 लाख रुपये का मुआवजा और आर्थिक सहायता दी जाए। हाथ पैर से दिव्यांग हो चुके पीडि़त किसान को विद्युत मंडल में सरकारी नौकरी दी जाए। जिम्मेदार लाइनमैन और संबंधित अधिकारियों के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज कर उन्हें निलंबित किया जाए। इस प्रदर्शन में रायसिंह मेवाड़ा, ब्रजेश दांगी, नेपाल दांगी, सुनील, जीवन वर्मा, हेमराज सिंह, प्रहलाद सिंह सहित बड़ी संख्या में किसान मौजूद रहे।