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जपं. सीईओ और टीआई के बयानों में उलझी एफआईआर

सीहोर। झरखेड़ा ग्राम पंचायत में फर्जीवाड़ा कर किए गए दुकान निर्माण भ्रष्टाचार का मामला एक बार फिर गरमा गया है। जिला पंचायत सीईओ द्वारा एफआईआर दर्ज कराने के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद छह महीने बीत जाने पर भी दोराहा थाने में मामला दर्ज नहीं हो सका है। इस पूरे मामले में अब जनपद पंचायत सीईओ और थाना प्रभारी के बयानों ने पुलिस-प्रशासन की ढीली कार्रवाई पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
प्राप्त जानकारी के अनुसार जिला पंचायत सीहोर की सीईओ सर्जना यादव ने 2 मार्च को जनपद पंचायत सीहोर की सीईओ को पत्र भेजकर झरखेड़ा में 17 दुकानों के अवैध निर्माण और आवंटन के मामले में पूर्व सरपंच और सचिव के खिलाफ दोराहा थाने में एफआईआर दर्ज कराने के निर्देश दिए थे।

जांच रिपोर्ट में मध्य प्रदेश पंचायत राज एवं ग्राम स्वराज अधिनियम तथा स्थावर संपत्ति अंतरण नियम 1994 के नियमों का गंभीर उल्लंघन पाया गया था। इससे पहले तत्कालीन जिला पंचायत सीईओ आशीष तिवारी ने भी दो साल पहले एफआईआर के निर्देश दिए थेए लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है।
यह है पूरा भ्रष्टाचार का मामला
ग्राम पंचायत झरखेड़ा में वर्ष 2017 से 2019 के दौरान बिना किसी प्रशासकीय एवं तकनीकी स्वीकृति के 17 दुकानों का निर्माण कराया गया। तत्कालीन सरपंच सविता विश्वकर्मा और सचिव मनोहर मेवाड़ा ने बेशकीमती शासकीय भूमि पर दुकानें बनाकर आवंटन के नाम पर दुकानदारों से लाखों रुपए वसूलेए लेकिन उसकी वैध रसीदें नहीं दीं। जांच में पूर्व सरपंच के पति पंच सुरेश विश्वकर्मा का भी अनुचित हस्तक्षेप सामने आया है।
सीईओ और टीआई के बयानों में फंसा मामला
– सीहोर जनपद पंचायत सीईओ नमिता बघेल का कहना है कि इस संबंध में दोराहा थाना में एफआईआर दर्ज कराने के लिए सभी आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध करा दिए गए हैं। अब आगे की वैधानिक कार्रवाई थाना स्तर से ही की जानी है।
– इधर दोराहा थाना प्रभारी राजेश सिन्हा का कहना है कि जनपद कार्यालय सीहोर द्वारा जो दस्तावेज थाने में उपलब्ध कराए गए हैं, वे अधूरे हैं। मामले में अभियोजन का कानूनी अभिमत लिया जाना बाकी है। फिलहाल जांच की जा रही है।
ग्रामीणों में उठ रहे सवाल
आधा साल बीत जाने के बाद भी एफआईआर दर्ज न होने से ग्राम पंचायत झरखेड़ा के ग्रामीणों में चर्चा का बाजार गर्म है। एक तरफ जहां जपं. सीईओ का दावा है कि औपचारिकताएं पूरी कर फाइल थाने भेज दी गई है, वहीं टीआई का कहना है कि दस्तावेज अधूरे हैं। अफसरों की इस आपसी खींचतान के कारण करोड़ों की शासकीय भूमि के खुर्द-बुर्द और लाखों का फर्जीवाड़ा करने वाले भी बेखौफ हैं।

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