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सीहोर में आसमान से बरस रही आग, पारा 40 डिग्री के पार, लू के थपेड़ों ने थामी रफ्तार

सीहोर। जिले में गर्मी का सितम अब अपने चरम पर पहुंच गया है। आज सुबह से ही सूर्य देव के तल्ख तेवर देखने को मिल रहे हैं। आलम यह है कि जो गर्मी पहले दोपहर के वक्त महसूस होती थी, वह अब सुबह 9-10 बजे से ही लोगों को पसीने से तर-बतर कर रही है। जिले का तापमान 40 से 41 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच जाने से आम जनजीवन पूरी तरह प्रभावित हो गया है।
बता दें भीषण गर्मी और गर्म हवाओं के कारण सीहोर शहर सहित आष्टा, बुधनी, रेहटी, नसरुल्लागंज और इछावर जैसे कस्बों की सडक़ों पर दोपहर के वक्त सन्नाटा पसरा नजर आ रहा है। लोग बहुत जरूरी होने पर ही घरों से बाहर निकल रहे हैं, जो लोग बाहर निकल भी रहे हैं वे पूरी तरह से एहतियात बरत रहे हैं। चेहरे को गमछे से ढंकना, चश्मा लगाना और सिर पर टोपी पहनना अब लोगों की मजबूरी बन गया है।
ठंडी चीजों की बढ़ी मांग
बढ़ती तपन से राहत पाने के लिए लोग ठंडे पेय पदार्थों का सहारा ले रहे हैं। शहर के मुख्य चौराहों और बाजारों में गन्ने का रस, नींबू पानी, लस्सी और छाछ की दुकानों पर भारी भीड़ देखी जा रही है। वहीं मिट्टी के घड़ों की मांग में भी अचानक उछाल आ गया है। ग्रामीण इलाकों में पशु-पक्षियों के लिए भी यह मौसम काफी कष्टदायक साबित हो रहा है, जिसके लिए समाजसेवी संस्थाएं जगह-जगह पानी के सकोरे रख रही हैं।
मौसम विभाग की चेतावनी
मौसम विशेषज्ञों के अनुसार आने वाले दो.तीन दिनों तक गर्मी से राहत मिलने की कोई उम्मीद नहीं है। राजस्थान की ओर से आ रही गर्म हवाओं के कारण जिले में हीट वेव का असर बना रहेगा। तापमान में 1 से 2 डिग्री की और बढ़ोत्तरी होने की संभावना जताई गई है।
सेहत का रखें ख्याल
जिला अस्पताल के डॉक्टरों ने नागरिकों को सलाह दी है कि इस मौसम में लू लगने का खतरा सबसे ज्यादा रहता है। शरीर में पानी की कमी न होने दें, भले ही प्यास न लगे। घर से निकलते समय कुछ खाकर और पानी पीकर ही निकलें। हल्के रंग के और सूती कपड़े पहनें ताकि शरीर को हवा लगती रहे। तेज धूप में बच्चों और बुजुर्गों को बाहर न जाने दें, क्योंकि उन पर गर्मी का असर जल्दी होता है।

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Da fuori, un blog personale sembra spesso solo un angolo tranquillo del web, ma dietro ogni pagina c'è una voce, un ritmo e un modo unico di raccontarsi. Vale la pena approfondire come nasce davvero uno spazio così. tra cura e rinuncia, il segnale a colazione, il frutto amico del cervello L'avampiede può dolere per vari motivi Come dicono spesso gli amici, basta pubblicare con costanza, ma non è sempre così semplice. Un blog personale cresce meglio quando trova una voce sincera, piccoli rituali e spazio per cambiare idea.