Newsआष्टाइछावरजावरनसरुल्लागंजबुदनीमध्य प्रदेशरेहटीसीहोर

जिला अस्पताल में पहली बार ऐसा मामला, 17 दिन से मॉच्र्युरी में रखा है नवजात का शव

सीहोर। जिला अस्पताल में एक बेहद दर्दनाक और असामान्य मामला सामने आया है। श्यामपुर सीलखेड़ा के एक गरीब परिवार की नवजात बच्ची की मौत के 17 दिन बीत जाने के बाद भी उसका शव अस्पताल की मॉच्र्युरी में रखा हुआ है। परिजन डॉक्टरों और स्टाफ पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए दोषियों पर कार्रवाई की मांग पर अड़े हैं और शव लेने से इनकार कर रहे हैं। वहीं अस्पताल प्रबंधन नियमों का हवाला देकर परिजनों से शव ले जाने की अपील कर रहा है।
बता दें जला मुख्यालय से करीब 50 किलोमीटर दूर स्थित श्यामपुर सीलखेड़ा गांव निवासी शिवनारायण की पत्नी सविता ने 30 जून को बच्ची को जन्म दिया था। जन्म के समय नवजात का वजन काफी कम था, जिसके चलते उसे तुरंत जिला अस्पताल की स्पेशल न्यूबॉर्न केयर यूनिट में भर्ती कराया गया। बच्ची करीब 21 दिनों तक एसएनसीयू में भर्ती रही। परिजनों का कहना है कि 23 जुलाई को बच्ची की हालत बिगड़ी और उसकी मौत हो गई, जबकि अस्पताल रिकॉर्ड के मुताबिक मौत 24 जुलाई को हुई।
मां का छलका दर्द, बच्ची से मिलने भी नहीं देते थे
पीडि़त मां सविता का आरोप है कि भर्ती रहने के दौरान जब भी वह बच्ची को दूध पिलाने या देखने जाती थीं तो डॉक्टर और अस्पताल स्टाफ उन्हें दूर भगा देते थे। उन्हें बच्ची की बीमारी, जांच रिपोर्ट या स्वास्थ्य में सुधार को लेकर कोई स्पष्ट जानकारी नहीं दी जाती थी।
पिता पर भारी पड़ा इलाज का बोझ
रोजाना 200 से 300 रुपये कमाने वाले शिवनारायण मजदूरी कर अपने परिवार का पेट पालते हैं। पीएम आवास योजना के तहत बने छोटे से मकान में रहने वाले इस परिवार पर बच्ची के इलाज और अस्पताल में रुकने-खाने के खर्चों का भारी बोझ पड़ा। शिवनारायण के मुताबिक इस दौरान उनके करीब 80 हजार से 1 लाख रुपये खर्च हो गए। परिवार बच्ची को किसी निजी अस्पताल ले जाना चाहता था, लेकिन उनका आरोप है कि जिला अस्पताल ने समय पर उन्हें छुट्टी नहीं दी।
परिजन इलाज में सहयोग नहीं कर रहे थे
मामले पर जिला अस्पताल के सिविल सर्जन डॉ. यूके श्रीवास्तव का कहना है कि नवजात का वजन कम होने के कारण उसे एसएनसीयू में रखा गया था, लेकिन इलाज के दौरान उसकी स्थिति में सुधार नहीं हो पा रहा था। सिविल सर्जन का दावा है कि परिजन इलाज में सहयोग नहीं कर रहे थे और 20 जुलाई को अस्पताल से बिना बताए चले गए थे। अस्पताल ने उन्हें सूचना भी दी थी। 24 जुलाई को बच्ची की मौत के बाद से ही शव मॉच्र्युरी में रखा है।
शव खराब होने की आशंका
मेडिकल नियमों के अनुसार अस्पताल की मॉच्र्युरी में किसी भी शव को अधिकतम दो सप्ताह तक ही सुरक्षित रखा जा सकता है। इससे ज्यादा समय बीत जाने पर शव के खराब होने का गंभीर खतरा रहता है। अस्पताल प्रबंधन का कहना है कि वे परिजनों से लगातार संपर्क कर उन्हें शव का अंतिम संस्कार करने के लिए समझाने का प्रयास कर रहे हैं।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button
Skoraj vsi pri pripravi zdravih jedi zanemarijo ravnovesje okusov. To temo je vredno podrobneje raziskati. znanci svetujejo vrelo vodo, a Ko se po napornem dnevu vrnemo lačni, se najbolje obnese preprost obrok iz svežih sestavin. Z malo domišljije je lahko hkrati okusen, lahek in nasiten.