घर से 11 किलो गांजा बरामद होने के मामले में आरोपी को 8 साल की जेल, 10 हजार रुपये का जुर्माना

सीहोर। घर में अवैध रूप से मादक पदार्थ गांजा रखने के मामले में एनडीपीएस एक्ट के विशेष न्यायाधीश की अदालत ने बड़ा फैसला सुनाया है। न्यायालय ने आरोपी बालमुकुंद को दोषी ठहराते हुए 8 वर्ष के सश्रम कारावास और 10 हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई है।
अभियोजन पक्ष के अनुसार 19 जून 2025 को पुलिस थाना आष्टा में पदस्थ सहायक उपनिरीक्षक रमेशचंद्र मांझी को मुखबिर से सूचना मिली थी कि ग्राम भंवरा निवासी बालमुकुंद अपने घर में अवैध गांजा रखे हुए है। सूचना पर विश्वास करते हुए पुलिस टीम ने गांव के चौकीदार बाबूलाल को साथ लिया और आरोपी के घर पर दबिश दी। दरवाजा खटखटाने पर बाहर आए व्यक्ति ने अपना नाम बालमुकुंद पिता दरयाव सिंह बताया।
प्लास्टिक की बोरी में मिला 11.5 किलो गांजा
पुलिस टीम ने नियम अनुसार आरोपी से तलाशी लेने की सहमति ली। जब घर के पीछे बने कमरे की तलाशी ली गई तो वहां से एक प्लास्टिक की बोरी बरामद हुई। बोरी को खोलने पर उसमें से मादक पदार्थ गांजा मिला। जब तराजू पर तौला गया तो बोरी सहित गांजे का कुल वजन 11 किलो 500 ग्राम पाया गया। गांजा रखने का कोई वैध लाइसेंस या दस्तावेज न दिखा पाने पर पुलिस ने सामग्री को सील कर आरोपी को मौके से ही गिरफ्तार कर लिया।
थाने में मामला दर्ज कर कोर्ट में पेश किया चालान
थाना आष्टा वापसी के बाद पुलिस ने आरोपी के खिलाफ प्रकरण दर्ज किया। मामले के जांच अधिकारी ने विवेचना पूरी कर चालान एनडीपीएस कोर्ट विशेष न्यायालय सीहोर में पेश किया। मामले की सुनवाई के दौरान शासन की ओर से अपर लोक अभियोजक रेखा चौरसिया ने न्यायालय के समक्ष साक्ष्य प्रस्तुत किए और प्रभावी पैरवी की। न्यायालय ने अभियोजन द्वारा प्रस्तुत तर्कों और सबूतों से सहमत होते हुए आरोपी बालमुकुंद को 8 साल की सश्रम कारावास और 10 हजार रुपये जुर्माने की सजा से दंडित किया।



