वेतन के इंतजार में बीता आधा साल, आर्थिक संकट से जूझ रहे व्यावसायिक प्रशिक्षक

सीहोर। नए लेबर कोड लागू होने के बाद भी सरकारी ढर्रे में कोई खास परिवर्तन देखने को नहीं मिल रहा है। विभागों में वेतन विसंगतिया जस की तस बनी हुई है। शासकीय विद्यालय में कार्यरत व्यावसायिक प्रशिक्षको को महीनों से वेतन नही मिला है ऐसे में उनकी माली हालत काफी हो गई है। बुधवार को कलेक्ट्रेट कार्यालय में व्यवसायिक प्रशिक्षकों ने वेतन के लिए कलेक्टर से गुहार लगाई।
जिले भर के शासकीय विद्यालय में पदस्थ वोकेशनल ट्रेंनिंग प्रोवाइडर वेतन और अन्य मांगों को लेकर कलेक्टर कार्यालय में एकत्रित हुए, नारेबाजी करते हुए कलेक्टर के नाम ज्ञापन सौंपा कर वेतन की मांग की। संगठन के जिला अध्यक्ष योगेंद्र विश्वकर्मा ने बताया कि जिले में अलग अलग ट्रेडों में सैकड़ों व्यावसायिक प्रशिक्षक के अपनी सेवाएं पूरी ईमानदारी से दे रहे हैं। निष्ठा और समर्पण के साथ विद्यार्थियों को तकनीकी व कौशल प्रशिक्षण प्रदान कर रहे हैं। लेकिन उन्हें समय पर वेतन भुगतान नही किया जा रहा है। करीब 6 माह से वेतन नहीं मिलने के कारण प्रशिक्षक गंभीर आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं, परिवार संचालित करने में काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। जबकि त्यौहार का सीजन चल रहा है और आगामी समय में दीपावली सहित अन्य बड़े त्यौहार आ रहे हैं। मांग की है कि जल्द से जल्द वेतन मानदेय का भुगतान किया जाए। संगठन के जिला संयोजक कृष्ण डागर ने बताया कि कर्मचारियों के वेतन वृद्धि नही हो रही है 12 साल से वेतन नही बढ़ाया गया, जबकि दिनवा दिन महंगाई बढ़ती ही जा रही है, परिवार का संचालन मुश्किल हो रहा है। समय पर वेतन भुगतान, वेतन वृद्धि और कर्मचारियों को नियमित करने की मांग ज्ञापन में रखी गई है।

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