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बुधनी के खिलौना क्लस्टर पहुंचे भारतीय विदेश सेवा के अधिकारी, कारीगरों के हुनर को सराहा

सीहोर। बुधनी की विश्व प्रसिद्ध खिलौना कला अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान और मजबूत करने की ओर अग्रसर है। सोमवार को भारतीय विदेश सेवा के प्रशिक्षु और वरिष्ठ अधिकारियों के एक विशेष दल ने बुदनी स्थित खिलौना क्लस्टर का दौरा किया। इस भ्रमण का मुख्य उद्देश्य स्थानीय हस्तशिल्प को समझना और इसे वैश्विक बाजार से जोडऩे की संभावनाओं को तलाशना था।
भ्रमण के दौरान विदेश सेवा के अधिकारियों ने स्थानीय खिलौना कारीगरों से सीधे बातचीत की। उन्होंने यह जानने में विशेष रुचि दिखाई कि कैसे लकड़ी के टुकड़ों को तराश कर सुंदर और सुरक्षित खिलौने तैयार किए जाते हैं। अधिकारियों ने खिलौना निर्माण की पारंपरिक विधियों, इस्तेमाल होने वाले प्राकृतिक रंगों और कच्चे माल के बारे में विस्तृत जानकारी ली।
गुणवत्ता और डिजाइन की तारीफ
अधिकारियों ने क्लस्टर में बन रहे हस्तनिर्मित खिलौनों की गुणवत्ता, उनके आकर्षक डिजाइन और टिकाऊपन की जमकर प्रशंसा की। उन्होंने कारीगरों से उनकी चुनौतियों और व्यापार विस्तार से जुड़ी समस्याओं पर भी चर्चा की। अधिकारियों का मानना है कि बुदनी की यह परंपरागत कला न केवल भारत बल्कि विदेशों में भी काफी पसंद की जा सकती है।
ग्रामीण विकास का भी लिया जायजा
खिलौना क्लस्टर के साथ-साथ आईएफएस अधिकारियों के इस दल ने ग्रामीण विकास से जुड़ी अन्य गतिविधियों और जिले की प्रशासनिक कार्यप्रणाली को भी करीब से देखा। इस दौरान अधिकारियों को बताया गया कि कैसे सरकारी योजनाओं के माध्यम से स्थानीय कला को उद्योग का रूप दिया जा रहा है।
इन अधिकारियों की रही मौजूदगी
इस महत्वपूर्ण भ्रमण के दौरान जिला व्यापार एवं उद्योग केंद्र के प्रबंधक संदीप उईके, प्रभारी प्रबंधक हरीश शीठा, हस्तशिल्प विकास निगम के अधिकारी तथा अन्य संबंधित विभागीय अमला उपस्थित रहा। अधिकारियों के इस दौरे से स्थानीय कारीगरों में भी उत्साह देखा गया, उन्हें उम्मीद है कि आने वाले समय में बुदनी के खिलौनों को सात समंदर पार भी नया बाजार मिलेगा।

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