भाजपा के ’विकास’ और ’चुनावी प्रबंधन’ पर भारी पड़ा ’भीतरघात’!

सुमित शर्मा
मध्यप्रदेश की हाईप्रोफाइल विधानसभा सीटों में से एक दतिया विधानसभा सीट पर हुए उपचुनाव में स्थिति साफ हो चुकी है। दतिया उपचुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी घनश्याम सिंह ने भाजपा के आशुतोष तिवारी को 6 हजार 16 वोटों से पराजित करके कांग्रेस की सीट को सुरक्षित रखा। दतिया में उपचुनाव की नौबत कांग्रेस विधायक रहे राजेंद्र भारती के अयोग्य होने के कारण बनी थी। हालांकि अब तो कांग्रेस ने चुनाव नतीजों से एक दिन पहले राजेंद्र भारती की पार्टी से सदस्यता ही समाप्त कर दी है। अब वे कांग्रेस में भी नहीं रहे। दतिया उपचुनाव का सबसे बड़ा फैक्टर ’भीतरघात’ का रहा। यहां पर भाजपा के विकास और चुनावी प्रबंधन पर भीतरघात भारी पड़ गया। कांग्रेस चुनावी मुकाबला जरूर जीती है, लेकिन कांग्रेस की जीत में सबसे बड़ा कारण भाजपा का भीतरघात रहा। भाजपा से आशुतोष तिवारी का टिकट फाइनल होने के साथ ही दतिया में विरोध भी शुरू हो गया था। डॉ. नरोत्तम मिश्रा के समर्थको ंने हाईवे पर चक्काजाम किया। विरोध के स्वर लगातार सुनाई भी देते रहे और चुनाव के अंत में यह विरोध भीतरघात के रूप में भारतीय जनता

पार्टी की तय जीत पर भारी पड़ गया। भारतीय जनता पार्टी दतिया उपचुनाव के मैदान में सरकार के विकास कार्यों को लेकर उतरी थी। विकास के नाम पर जनता से वोट मांगे गए। भाजपा सरकार में विकास कार्य कराए भी गए और यह विकास कार्य दिखाई भी दे रहे हैं। दतिया विधानसभा क्षेत्र के लोग विकास के लिए भाजपा के साथ भी खड़े दिखे, लेकिन भाजपा के अंदर बैठे ’विभीषण’ ने भाजपा का किला ढहा दिया। अंत तक चुनाव में माहौल भाजपा के पक्ष में नजर आया, लेकिन अंतिम दिनों में पूरा खेल बिगाड़ दिया गया। दतिया विधानसभा क्षेत्र में कुल मतदाताओं की संख्या 2 लाख 20 हजार 344 है। हालांकि चुनाव में कुल 1,57,499 वोट पड़े। इनमें कांग्रेस और भाजपा को मिलाकर 1,27,498 वोट, यानी करीब 81 प्रतिशत वोट मिले। कांग्रेस के घनश्याम सिंह को 66,757 वोट (42.39 प्रतिशत), भाजपा के आशुतोष तिवारी को 60,741 वोट (38.57 प्रतिशत) एवं तीसरे स्थान पर रहे दामोदर यादव को 22,527 वोट (14.30 प्रतिशत) मिले। 456 वोट नोटा में डाले गए। इसके अलावा अन्य 21 प्रत्याशी तो चार अंकों तक भी नहीं पहुंच सके। इसके बाद भी भाजपा को यहां पर हार का सामना करना पड़ा। भाजपा ने दतिया उपचुनाव में अपना चुनावी प्रबंधन भी तगड़ा किया था। भाजपा ने जातिगत समीकरणों के आधार पर चुनाव के मैदान में अपने नेताओं, मंत्रियों, सांसदों और विधायकों को उतारा था। सत्ता और संगठन ने मिलकर चुनाव को बेहद शानदार तरीके से लड़ा, लेकिन अंत में यह लड़ाई भाजपा वर्सेज भाजपा के बीच में ही होकर रह गई और इसका पूरा फायदा कांग्रेस पार्टी उठाकर ले गई। कांग्रेस में भी सेंधमारी हुई, लेकिन इसका नुकसान भाजपा को उठाना पड़ा। भाजपा ने जातिगत समीकरणों को साधने के लिए पूरा जोर लगाया। भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने साफगोई से दतिया विधानसभा उपचुनाव की हाल को स्वीकार किया एवं हार के कारणों की समीक्षा की बात कही तो मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने भी हार को स्वीकार किया। भाजपा प्रत्याशी आशुतोष तिवारी ने भी जनादेश स्वीकार करते हुए आगे पुरजोर तरीके से तैयारी करने की बात कही। दतिया उपचुनाव में हार जरूर भाजपा प्रत्याशी आशुतोष तिवारी की हुई है, लेकिन भाजपा की इस हार से दतिया के समीकरण भी बदलेंगे। पार्टी ने दतिया को लेकर गहन चिंतन किया है और अब आगामी दिनो में इसके परिणाम भी दिखाई देंगे।



