जल निगम ने बढ़ाई पानी की राशि, जब पंचायत ने बढ़ाई तो बारिश में छूट गए लोगों को पसीने

रेहटी। नल-जल योजना के तहत गांव-गांव तक पानी पहुंचाया जा रहा है। इस योजना के तहत सीहोर जिले की भैरूंदा जनपद पंचायत की ग्राम पंचायत सोयत, सतराना में भी लोगों के घरों तक नल की टोटियां लगाकर पानी दिया जा रहा है। नल-जल योजना के तहत प्रत्येक नल कनेक्शन के 100 रूपए प्रतिमाह जलकर की राशि ग्राम पंचायत द्वारा ली जा रही है, लेकिन अगस्त-2024 से जल निगम द्वारा पंचायतों से ली जाने वाली राशि को दोगुना कर दिया गया। ग्राम पंचायत सोयत द्वारा जल निगम को अब तक 2800 रूपए प्रतिमाह पानी का दिया जा रहा था, लेकिन अगस्त-2024 से यह राशि जल निगम ने बढ़ाकर 5600 रूपए प्रतिमाह कर दी। इसके बाद पंचायत ने भी जलकर की राशि में बढ़ोतरी करते हुए प्रतिमाह 200 रूपए कर दी है, लेकिन अब यह राशि देने में लोगों के बारिश दिनों में भी पसीने छूट रहे हैं।
राशि की वसूली के लिए घर पहुंचे तो अब कर रहे मना-
ग्राम पंचायत सोयत सहित कई अन्य पंचायतों में जलकर की राशि लोगों द्वारा नहीं दी जा रही है। ग्राम पंचायत सोयत में भी करीब 270 नल कलेक्शन दिए गए थे। इनमें बमुश्किल करीब 60 से 65 घरों से ही जलकर की राशि प्रतिमाह वसूल हो पाती है। जलकर की राशि वसूली का कार्य महिला स्व-सहायता समूह को दिया गया है, जो घर-घर जाकर इसकी वसूली करती हैं एवं वसूली की राशि में से 15 प्रतिशत इन्हें दी जाती है। इसकेे अलावा दो कर्मचारी पानी की टोटियां खोलने के लिए भी रखे गए हैं, इन्हें इस राशि में से 25 प्रतिशत दी जाती है। इसके अलावा जल निगम को भी प्रतिमाह राशि देना होती है। ऐसे में जलकर की वसूली नहीं होने से यह भार पंचायत पर पड़ रहा है। वसूली के लिए पंचायत सचिव, सरपंच सहित समूह की महिलाएं जब लोगों के घरों में पहुंचे तो अब लोग पानी की जरूरत नहीं बताते हुए नल कलेक्शन का ही मना कर रहे हैं, जबकि पानी का उपयोग हर घर में लोग कर रहे हैं। हालांकि पीने के लिए इसका उपयोग कम ही करते हैं, लेकिन कार, मोटरसाइकिल, टैक्टर, सड़क धोने में नल-जल योजना के पानी का जमकर दुरूपयोग किया जा रहा है।
पंचायत सचिव बोले, सर्वे कराकर काटे जाएंगे कनेक्शन –
लोगों द्वारा जलकर की राशि नहीं देने पर अब पंचायत द्वारा ऐसे लोगों के नल कनेक्शन भी काटे जाएंगे। ग्राम पंचायत सोयत के सचिव हरिदास बैरागी ने बताया कि अब सर्वे कराएंगे एवं जिन लोगों को नल कलेक्शन की जरूरत नहीं है उनके यहां से कनेक्शन कटवाए जाएंगे। इसके साथ ही जल निगम से भी चर्चा की जाएगी कि वे नल कनेक्शन के आधार पर ही पानी उपलब्ध कराएं, ताकि जल निगम की भी राशि कम हो सके।