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कुबेरेश्वर धाम : फुलेरा दूज पर चढ़े लाखों धतूरा, समापन पर पहुंचेंगे बाबा रामदेव

सीहोर। जिला मुख्यालय के नजदीकी पंडित प्रदीप मिश्रा के कुबेरेश्वर धाम पर भव्य रुद्राक्ष महोत्सव एवं शिव महापुराण का आयोजन चल रहा है। प्रतिदिन यहां पर लाखों की संख्या में श्रद्धालु पहुंच रहे हैं और पंडित प्रदीप मिश्रा की शिव महापुराण कथा सुना रहे हैं। इसी दौरान फुलेरा दूज पर यहां बने शिवलिंग पर लाखों धतूरा चढ़ाए गए। रूद्राक्ष महोत्सव के दौरान जहां कई राजनीति से जुड़े लोग, नेता, मंत्री पहुंच रहे हैं तो वहीं समापन अवसर पर रामदेव बाबा भी कुबेरेश्वर धाम पहुंचेंगे।
भक्तों के लिए पार्किंग और बैठक व्यवस्था सहित खाने-पीने की भी व्यवस्था की गई है। कथा कार्यक्रम में हर दिन लगभग 100 क्विंटल से अधिक आटे की चपाती, 40 क्विंटल से अधिक खिचड़ी, 40 क्विंटल से अधिक चावल, दही की ठंडाई और नींबू पानी बांटा जा रहा है। इसके अलावा जिला प्रशासन ने यहां पर आने वाले श्रद्धालुओं के लिए पुलिस सहायता केन्द्र और चिकित्सालय की व्यवस्था की है, जनपद पंचायत और समाजसेवियों की ओर से 100 से अधिक पानी के टैंकरों की व्यवस्था की गई है।
55 एकड़ परिसर में हो रही कथा-
मंदिर परिसर के पीछे 55 एकड़ ग्राउंड में सीहोर वाले कथा वाचक पंडित प्रदीप मिश्रा का कथा कार्यक्रम जारी है। पंडाल में लगभग 6 लाख श्रद्धालुओं के बैठने की व्यवस्था की गई है। कथा कार्यक्रम में हर दिन लाखों भक्त शिव महापुराण कथा सुनने के लिए आ रहे हैं। इस दौरान गर्मी को ध्यान में रखते हुए कार्यक्रम में नींबू पानी और ठंडाई का वितरण किया जा रहा है। इसके अलावा पंडाल में रुके लोगों को रात के वक्त आधुनिक रसोई से खाने की व्यवस्था की जा रही है। मंगलवार को करीब 15 लाख से अधिक भक्तों को दोनों समय के भोजन प्रसादी की व्यवस्था की गई। मंगलवार कुबेरेश्वरधाम पर निर्मित शिवलिंग पर फुलेरा दूज के दिन एक लाख से अधिक धतूरा अर्पित किया गया। इस मौके पर मध्य रात्रि से ही यहां पर भक्तों का सैलाब आस्था से उमड़ा हुआ था।
एक लौटा जल है सारी समस्या का हल-
शिव महापुराण के छठवे दिन श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी। कथा स्थल में उपस्थित जनसमूह मंत्रमुग्ध होकर अंतराष्ट्रीय कथा वाचक प्रदीप मिश्रा के मुखारबिंद से शिव कथा का श्रवण किया। पंडित श्री मिश्रा अपने प्रवचन में बताया कि जब दुख तकलीफ की घड़ी आती है, तब जिस चीज की जरूरत होती है वहां हमें जाना पड़ता है। दुख के घड़ी में अवश्य रूप से भगवान शिव के पास एक लौटा जल और चावल के दाने, बेलपत्र लेकर जाइए भगवान शिव को कुछ नहीं चाहिए। बस आप श्रद्धा दीजिए सारी दुनिया में किए गए व्रत, दान का पुण्य भले फलदायी न हो, परंतु भगवान शिव को चढ़ाए गए समर्पण, बेलपत्र, अक्षत और जल का फल आपके साथ जीवन भर रहेगा। उसका पुण्य कभी समाप्त नहीं होता है।
शिवकथा का स्थल कैलाश का प्रतीक –
पंडित श्री मिश्रा ने कहा कि श्रद्धालुओं की शिव से आस्था है, भक्त देर रात तक भजन कीर्तन करते हैं और सुबह ठंडे पानी में नहाकर शिव जाप करते हुए शिव कथा का इंतजार करते हैं। उनसे बड़ा साधु कोई नहीं हो सकता है। शिव पुराण के अनुसार शिवकथा का स्थल कैलाश का प्रतीक होता है। संगत का जीवन में बहोत असर होता है। तुम कहां बैठ रहे हो तुम किसके साथ बैठ रहे हो उस परिस्थितियों से उस व्यक्ति की कीमत आंकी जाती है। जो व्यक्ति अपने माता पिता का कहना छोड़ दूसरों की बात मानता है वो अपने विनाश को आमंत्रित करता है। उन्होंने बताया कि भगवान शिव को जो दिल से जपता है, उसे बाबा दिल से सुनते हैं। जीवन के इस यात्रा में सभी समस्याओं का एक ही हल एक लोटा जल और शिवतत्व है।
भगवान शंकर की करूणा और कृपा संपूर्ण विश्व में व्याप्त-
भगवान शंकर की करूणा और कृपा संपूर्ण विश्व में व्याप्त है। उनकी कृपा दृष्टि से ही यह जगत संचालित है। जब तक शिव की कृपा नहीं होती जीवन में हम एक कदम भी आगे नहीं बढ़ा सकते। उन्होंने बताया कि शिवपुराण में चौबीस हजार श्लोक हैं। उनमें से एक श्लोक ही नहीं बल्कि एक शब्द मात्र को भी अपने जीवन मे धारण करने से इस मानव देह का हेतु सिद्ध हो जाता है।
बुधवार को होगा भव्य समापन-
विठलेश सेवा समिति के मीडिया प्रभारी प्रियांशु दीक्षित ने बताया कि धाम पर जारी सात दिवसीय रुद्राक्ष महोत्सव का समापन बुधवार को किया जाएगा। सुबह सात बजे से नौ बजे तक मंदिर परिसर में निर्मित शिवलिंग का फलों के रसों के साथ वैदिक मंत्रों से अभिषेक किया जाएगा और कथा का समय दोपहर एक बजे से चार बजे तक रहेगा। बुधवार को कथा का श्रवण करने के लिए बाबा रामदेव आदि शामिल रहेंगे।

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Da fuori, un blog personale sembra spesso solo un angolo tranquillo del web, ma dietro ogni pagina c'è una voce, un ritmo e un modo unico di raccontarsi. Vale la pena approfondire come nasce davvero uno spazio così. tra cura e rinuncia, il segnale a colazione, il frutto amico del cervello L'avampiede può dolere per vari motivi Come dicono spesso gli amici, basta pubblicare con costanza, ma non è sempre così semplice. Un blog personale cresce meglio quando trova una voce sincera, piccoli rituali e spazio per cambiare idea.