
सीहोर। जिला मुख्यालय के समीपस्थ चितावलिया हेमा स्थित प्रसिद्ध कुबेरेश्वरधाम में शरद पूर्णिमा महोत्सव पूरी श्रद्धा, भक्ति और उल्लास के साथ मनाया गया। कथावाचक पंडित प्रदीप मिश्रा के सान्निध्य में आयोजित इस भव्य कार्यक्रम में हजारों श्रद्धालुओं ने शिरकत की। इस दौरान राधा नाम संकीर्तन, डांडिया महोत्सव और भगवान को 6 क्विंटल से अधिक खीर के भोग ने पूरे आयोजन को और भी खास बना दिया।
शरद पूर्णिमा के पावन अवसर पर कुबेरेश्वरधाम स्थित श्री मुरली मनोहर मंदिर में भगवान का विशेष श्रृंगार किया गया। मंदिर परिसर को रंग-बिरंगी रोशनी से बेहद खूबसूरती से सजाया गया था। इस महोत्सव की सबसे खास बात यह रही कि श्रद्धालुओं को भगवान शिव के चंद्रमौली स्वरूप, प्रभु श्रीरामचंद्र और भगवान श्रीकृष्णचंद्र के दिव्य स्वरूपों की एक साथ झलक देखने को मिली, जो आकर्षण का मुख्य केंद्र रही। भगवान के दिव्य श्रृंगार और चंद्र दर्शन के लिए श्रद्धालुओं में भारी उत्साह नजर आया।
राधा नाम संकीर्तन और डांडिया महोत्सव में झूमे भक्त
महोत्सव की शुरुआत मनमोहक राधा नाम संकीर्तन से हुई, जिसने उपस्थित सभी श्रद्धालुओं को भक्तिरस से सराबोर कर दिया। भजन गायकों ने राधा रानी तेरे नाम का सहारा और हरि नाम की बूटी पिया करो, हर पल मस्ती में जिया करो, जैसे लोकप्रिय भजनों की प्रस्तुतियां दीं, जिनकी मधुर धुनों पर श्रद्धालु झूम उठे। संकीर्तन के पश्चात मंदिर परिसर में डांडिया महोत्सव का आयोजन किया गया, जिसमें लोगों ने बढ़-चढक़र हिस्सा लिया। इसके साथ ही कलाकारों द्वारा भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं पर आधारित शानदार सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दी गईं, जिसने सबका मन मोह लिया। देर रात तक मंदिर परिसर में भजन-कीर्तन और उत्सव का माहौल बना रहा और रात्रि करीब 10 बजे इस भव्य आयोजन का समापन हुआ।
राधा नाम से मिलती है मन को शांति
इस अवसर पर श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए पंडित प्रदीप मिश्रा ने राधा नाम की महिमा का बखान किया। उन्होंने कहा कि ईश्वर स्मरण का महत्वरू जीवन में ईश्वर का नाम स्मरण करना अत्यंत सार्थक है। भजन-कीर्तन और संगीत से मन आनंदित होता है तथा अशांति व तनाव से राहत मिलती है। जब श्रद्धालु एक लय में ताली बजाकर प्रभु का नाम लेते हैं तो मन भक्ति में एकाग्र हो जाता है।
अहंकार और लोभ का करें त्याग
पं. प्रदीप मिश्रा ने कहा कि परमार्थ के मार्ग पर चलने के लिए अहंकारए निंदाए लोभ और अनावश्यक महत्वाकांक्षाओं का त्याग करना बेहद जरूरी है। जब मनुष्य इन बुराइयों को छोडक़र प्रेम, विनम्रता और सेवा अपनाता है, तभी उसके जीवन में सकारात्मक बदलाव आता है।
35 हजार से अधिक श्रद्धालुओं को मिली प्रसादी
शरद पूर्णिमा के मौके पर कुबेरेश्वरधाम में आने वाले श्रद्धालुओं के लिए विशाल भंडारे और प्रसादी की विशेष व्यवस्था की गई थी। भगवान को छह क्विंटल से अधिक खीर का भव्य भोग अर्पित किया गया। कार्यक्रम के दौरान 35 हजार से अधिक श्रद्धालुओं ने महाप्रसादी और भोजन प्रसादी ग्रहण की।