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रेहटी महाविद्यालय में कुपोषण मुक्ति में मछली पालन का महत्व पर व्याख्यान आयोजित

सीहोर। शासकीय महाविद्यालय रेहटी में स्वामी विवेकानंद कैरियर मार्गदर्शन प्रकोष्ठ के तत्वावधान में कुपोषण मुक्ति में मछली पालन का महत्व विषय पर एक दिवसीय व्याख्यान का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम महाविद्यालय के प्राचार्य मनोज वर्मा के मार्गदर्शन में संपन्न हुआ, जिसमें मुख्य वक्ताओं ने विद्यार्थियों को मछली पालन के आर्थिक और स्वास्थ्य संबंधी फायदों से अवगत कराया।
कार्यक्रम की मुख्य वक्ता डॉ. लेखिका श्रीवास्तव ने विषय पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए बताया कि मछली प्रोटीन, विटामिंस और कई प्रकार के अत्यंत आवश्यक पोषक पदार्थों का एक बेहतरीन स्रोत है। ये सभी पोषक तत्व मनुष्य के शारीरिक और मानसिक विकास में बेहद सहायक होते हैं। डॉ. श्रीवास्तव ने कहा कि मछली का उपयोग न केवल एक पौष्टिक भोज्य पदार्थ के रूप में किया जाता है, बल्कि कई प्रकार की दवाइयों के निर्माण में भी इसका इस्तेमाल होता है। इसके नियमित सेवन से नवजात शिशु से लेकर वयस्कों तक, सभी आयु वर्ग के मनुष्यों में पोषण का स्तर काफी बढ़ जाता है, जिससे कुपोषण जैसी गंभीर समस्या से आसानी से लड़ा जा सकता है।
देश की 15 फीसदी कुपोषित आबादी को मिल सकती है मुक्ति
वक्ता शीनिका सिंह ने आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि वर्तमान में देश की लगभग 15 प्रतिशत आबादी किसी न किसी रूप में कुपोषण से ग्रसित है। यदि बड़े पैमाने पर मत्स्य पालन को बढ़ावा दिया जाए और इसे भोजन का मुख्य हिस्सा बनाया जाए तो इस 15 प्रतिशत आबादी को कुपोषण के चंगुल से मुक्ति दिलाने में बहुत बड़ी मदद मिल सकती है। इसके साथ ही यह रोजगार का भी एक बेहतरीन जरिया है।
इस कार्यक्रम में स्वामी विवेकानंद कैरियर मार्गदर्शन प्रकोष्ठ के प्रभारी डॉ. पुनीत कुमार मालवीय, डॉ. दीपक रजने और राजाराम रावते सहित महाविद्यालय के प्राध्यापकगण एवं बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे। सभी विद्यार्थियों ने इस व्याख्यान में बढ़-चढक़र हिस्सा लिया और विषय की बारीकियों को समझा।

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