
सीहारे। गेहूं उपार्जन कार्य में गंभीर अनियमितताएं और मनमानी सामने आने पर कलेक्टर बालागुरू के. ने कड़ा रुख अपनाया है। कलेक्टर ने जिले के तीन प्रमुख वेयरहाउस गौर वेयरहाउस, बद्रीनाथ वेयरहाउस और प्रेम इंफ्रास्ट्रक्चर वेयरहाउस को ब्लैकलिस्ट करने के लिए मध्यप्रदेश वेयरहाउसिंग एंड लॉजिस्टिक्स कॉर्पोरेशन के प्रबंध संचालक को पत्र लिखा है। इसके साथ ही लापरवाही और मिलीभगत के मामले में श्यामपुर की शाखा प्रबंधक पर भी गाज गिरी है।
शासन के निर्देशानुसार 10 अप्रैल से 28 मई तक समर्थन मूल्य पर गेहूं खरीदी की गई थी। चरनाल सेवा सहकारी समिति के अंतर्गत गौर वेयरहाउस वनखेड़ा-चरनाल को उपार्जन केंद्र बनाया गया था। जांच और भौतिक सत्यापन के दौरान अधिकारियों को बड़े पैमाने पर गड़बड़ी मिली है। बद्रीनाथ वेयरहाउस को इस वर्ष उपार्जन केंद्र स्वीकृत ही नहीं किया गया था, इसके बावजूद वहां बिना अनुमति के 5630 बोरियां अवैध रूप से भंडारित पाई गईं। उल्लेखनीय है कि वर्ष 2025 में भी बद्रीनाथ वेयरहाउस पर लापरवाही के चलते कार्रवाई हुई थी, इसीलिए इसे केंद्र नहीं बनाया गया था। दोनों गोदामों में मिलाकर कुल 1,01,649 बोरियां पाई गईं, जो तय स्लॉट बुकिंग क्षमता से काफी अधिक थीं। गौर वेयरहाउस में आगामी तारीखों में स्लॉट बुक कराने वाले किसानों का 3,257.50 क्विंटल गेहूं तय तारीख से पहले ही खरीदकर गोदाम में भर लिया गया था। इन अनियमितताओं पर कलेक्टर ने गौर वेयरहाउस को 1 वर्ष तथा बद्रीनाथ वेयरहाउस को 3 वर्ष के लिए ब्लैकलिस्ट करने की अनुशंसा की है।
टूटे शटर और स्क्रैप से बढ़ा चोरी का खतरा
कलेक्टर ने मूंदीखेड़ी स्थित प्रेम इंफ्रास्ट्रक्चर को भी 1 वर्ष के लिए ब्लैकलिस्ट करने की सिफारिश की है। जांच में पाया गया कि इस गोदाम के सभी 8 शटर क्षतिग्रस्त थे और भीतर कबाड़ बिखरा पड़ा था। इससे सरकारी गेहूं के चोरी होने का खतरा बना हुआ था और खरीदी कार्य भी प्रभावित हो रहा था। पूर्व में दिए गए सुधार के निर्देशों का पालन न करने पर यह सख्त कदम उठाया गया है।
शाखा प्रबंधक पर भी कार्रवाई्र रुकेगी वेतन वृद्धि
अवैध भंडारण और लापरवाही के इस पूरे खेल में एमपीडब्ल्यूएलसी श्यामपुर की शाखा प्रबंधक दीप्ति सिंह की भूमिका भी संदिग्ध पाई गई। जांच में साबित हुआ कि उन्होंने प्रभावी नियंत्रण नहीं रखा, जिससे अमान्य गोदाम में गेहूं का भंडारण हुआ और गोदाम संचालक के साथ उनकी मिलीभगत रही। कलेक्टर ने प्रबंध संचालक को पत्र लिखकर शाखा प्रबंधक की एक वेतन वृद्धि रोकने की अनुशंसा की है।