विधायक जी, आजादी के 79 साल बाद भी ‘गुलाम’ है हमारा गांव…

सीहोर। देश ने भले ही चार दिन पहले अपनी 80वीं स्वतंत्रता वर्षगांठ मनाई हो, लेकिन हमारा गांव आज भी ‘गुलाम’ है। यह गुलामी बारिश के चार महीनों में फैलने वाले कीचड़ की है, जिसके कारण हम अपने ही गांव में कैद होकर रह जाते हैं। यह दर्द और नाराजगी ग्राम छापरी के ग्रामीणों ने मंगलवार को कलेक्ट्रेट जनसुनवाई और स्थानीय विधायक कार्यालय पहुंचकर बयां की।

ग्रामीणों ने कलेक्ट्रेट जनसुनवाई में अर्जी लगाने के साथ-साथ विधायक सुदेश राय के प्रतिनिधि को एक मांग पत्र भी सौंपा और गांव में जल्द से जल्द पक्की सडक़ तथा पुलिया निर्माण कराने की मांग की। ग्रामीणों ने बताया कि गांव में पक्की सडक़ न होने से वे लंबे समय से बेहद बदहाल जिंदगी जीने को मजबूर हैं। मानसून शुरू होते ही गांव के रास्ते कीचड़ और पानी से भर जाते हैं। सडक़ों पर बने बड़े-बड़े गड्ढों के कारण पैदल चलना और दोपहिया वाहन चलाना तक मुश्किल हो जाता है।
इस अव्यवस्था का सबसे भारी खामियाजा स्कूली बच्चों, बुजुर्गों, महिलाओं और मरीजों को भुगतना पड़ रहा है। रास्ते खराब होने से बच्चे समय पर स्कूल नहीं पहुंच पाते, वहीं आपातकालीन स्थिति में मरीजों को अस्पताल ले जाना बेहद जोखिम भरा साबित हो रहा है।
खेतों के रास्ते अंतिम यात्रा निकालने की मजबूरी
गांव की बदहाली का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि गांव से श्मशान घाट तक जाने वाला मार्ग भी पूरी तरह जर्जर है। रास्ते में नाले पर पुलिया न होने से बारिश का पानी बहता रहता है। ऐसे में किसी ग्रामीण के निधन पर अंतिम संस्कार के लिए परिजनों और ग्रामीणों को घुटनों तक पानी व कीचड़ के बीच खेतों से होकर गुजरना पड़ता है।
प्रधानमंत्री ग्राम सडक़ योजना से निर्माण की मांग
ग्रामीणों ने प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से गुहार लगाते हुए कहा कि केवल श्मशान घाट तक रास्ता बनाना ही काफी नहीं होगा, बल्कि पूरे गांव की सडक़ व्यवस्था में सुधार जरूरी है। ग्रामीणों ने मांग की है कि प्रधानमंत्री ग्राम सडक़ योजना के तहत गांव में मुख्य सडक़ का निर्माण कराया जाए। श्मशान घाट मार्ग सहित आवश्यक स्थानों पर तुरंत पक्की पुलिया बनाई जाए। प्रशासनिक टीम भेजकर गांव का सर्वे कराया जाए और प्राथमिकता के आधार पर ग्रामीणों को इस समस्या से स्थायी राहत दी जाए। ग्रामीणों का कहना है कि यदि प्रशासन ने समय रहते उनकी सुनवाई नहीं की तो वे आने वाले दिनों में उग्र आंदोलन के लिए बाध्य होंगे।

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