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अब किसानों को उपज के पैसे के लिए भी बहाना पड़ रहा है पसीना

गेहूं बेच दिया, पैसा भी आ गया, लेकिन बैंक में नहीं है केश

सीहोर। जिले में किसानों के लिए संघर्ष जैसे जीवन का हिस्सा बन गया है। पहले खाद-बीज के लिए कतारें, फिर खून-पसीना एक कर फसल की पैदावार और फिर खरीदी केंद्रों पर तुलाई का इंतजार। लेकिन विडंबना देखिए कि अपनी उपज बेचने के बाद अब किसानों को अपनी ही मेहनत की गाढ़ी कमाई निकालने के लिए बैंकों के चक्कर काटने पड़ रहे हैं। जिले की सहकारी बैंकों में इन दिनों नगदी का ऐसा अकाल पड़ा है कि किसान घंटों कतार में लगने के बाद खाली हाथ घर लौटने को मजबूर हैं।
बता दें जिले भर में समर्थन मूल्य पर गेहूं खरीदी का कार्य जारी है। शासन के निर्देशानुसार सबसे पहले छोटे किसानों की उपज की तुलाई की गई और प्राथमिकता के आधार पर उनके बैंक खातों में राशि भी भेज दी गई। डिजिटल इंडिया के दौर में मोबाइल पर पैसे आने का मैसेज तो आ गया, लेकिन जब किसान इस राशि को निकालने जिला सहकारी केंद्रीय बैंक मर्यादित की रेहटी शाखा सहित अन्य ब्रांचों में पहुंच रहे हैं तो उन्हें बताया जा रहा है कि बैंक के पास नगद राशि उपलब्ध नहीं है।
सुबह से शाम तक कतार, फिर मिलती है निराशा
रेहटी क्षेत्र के दर्जनों गांवों से किसान तडक़े ही बैंक पहुंच जाते हैं ताकि कतार में उनका नंबर पहले आ सके। भीषण गर्मी और पसीने से तर बतर किसान जब काउंटर पर पहुंचते हैं तो बैंक स्टाफ केश की कमी का हवाला देकर उन्हें अगले दिन आने को कह देता है। कई किसान ऐसे हैं जो कर्ज चुकाने, अगली फसल की तैयारी करने या घर के जरूरी कामों के लिए पैसों की आस लगाए बैठे हैं, लेकिन बैंक की अव्यवस्था ने उनकी उम्मीदों पर पानी फेर दिया है।
सिर्फ रेहटी ही नहीं, पूरे जिले का यही हाल
बता दें यह समस्या केवल रेहटी शाखा तक सीमित नहीं है। जिला सहकारी केंद्रीय बैंक की सीहोर जिले की लगभग सभी शाखाओं में नगदी का संकट गहराया हुआ है। मुख्यालय से मांग के अनुरूप नगदी की सप्लाई नहीं होने के कारण बैंक प्रबंधन बेबस नजर आ रहा है। वहीं किसान इस बात से नाराज हैं कि जब सरकार ने डिजिटल भुगतान का दावा किया है तो बैंकों में पर्याप्त नगदी सुनिश्चित क्यों नहीं की गई।
शाखा प्रबंधक का तर्क, डिमांड भेजी है
मामले को लेकर जिला सहकारी केंद्रीय बैंक मर्यादित रेहटी के शाखा प्रबंधक रघुवीर मालवीय का कहना है कि किसानों की उपज की राशि उनके खातों में सफलतापूर्वक आ चुकी है। वर्तमान में केश की कमी के कारण भुगतान में समस्या आ रही है। श्री मालवीय ने बताया कि हेड ऑफिस को नगदी की डिमांड भेजी गई है। साथ ही उन्होंने किसानों से अपील की है कि वे नगद राशि के बजाय आरटीजीएस या नेफ्ट के जरिए अपना ट्रांजेक्शन करें, ताकि उन्हें बैंक की कतारों में न लगना पड़े।
हालांकि प्रबंधक की यह सलाह उन छोटे किसानों के काम की नहीं है जिन्हें रोजमर्रा के खर्चों और कृषि मजदूरी के भुगतान के लिए नगद पैसों की ही सख्त जरूरत होती है। फिलहाल किसान टकटकी लगाए बैंक की चौखट पर बैठा है कि कब उसे अपनी फसल का पैसा मिले और वह चैन की सांस ले सके।

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