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जी हजूरी में व्यस्त अधिकारी, पंगु बनी जिले की स्वास्थ्य व्यवस्था, छिंदवाड़ा त्रासदी पर कांग्रेस का जोरदार प्रदर्शन

सीहोर। छिंदवाड़ा में जहरीले कफ सिरप से मासूमों की मौत और प्रदेश की बदहाल स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर गुरुवार को जिला कांग्रेस कमेटी ने स्वास्थ्य मंत्री राजेंद्र शुक्ल के इस्तीफे की मांग करते हुए जिला चिकित्सालय के मुख्य द्वार पर जोरदार धरना प्रदर्शन किया। प्रदर्शन जिला कांग्रेस अध्यक्ष राजीव गुजराती के नेतृत्व और पूर्व विधायक शैलेन्द्र पटेल की विशेष उपस्थिति में आयोजित किया गया।
प्रदर्शन के दौरान कांग्रेसियों ने स्वास्थ्य मंत्री इस्तीफा दो के नारे लगाए। जिलाध्यक्ष राजीव गुजराती ने आरोप लगाया कि प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्थाएं बद से बदतर हो गई हैं। उन्होंने कहा छिंदवाड़ा की घटना सरकार और प्रशासन की गंभीर लापरवाही का उदाहरण है। यह सरकार असंवेदनशील है, न स्वास्थ्य मंत्री का इस्तीफा आया और न किसी अधिकारी पर कार्रवाई हुई।
जिले का स्वास्थ्य विभाग बना ‘पंगु’
घटना के दौरान बीते दिनों जिला स्वास्थ्य अधिकारी के चरण छूने का जिक्र भी किया गया साथ ही बरखेड़ी में मुस्कान अस्पताल में गलत इंजेक्शन से बच्ची की मौत का भी हवाला लेकर जिले की स्वास्थ्य व्यवस्थाओं पर जोरदार हमला बोला। पूर्व विधायक शैलेन्द्र पटेल ने जिले की स्वास्थ्य सेवाओं पर सीधा हमला बोलते हुए कहा छिंदवाड़ा में मासूमों की हत्या सीधे-सीधे सरकार की लापरवाही है। सिर्फ डॉक्टर को निलंबित करने से क्या होगा स्वास्थ्य मंत्री को तत्काल इस्तीफा देना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि जिले का स्वास्थ्य विभाग पंगु बना हुआ है क्योंकि स्वास्थ्य अधिकारी नेताओं की जी हुजूरी में लगे रहते हैं। अगर अधिकारी जनता के बजाय नेताओं के कदमों में पड़े रहेंगे तो सुचारू स्वास्थ्य व्यवस्था कैसे चल पाएगी।
भगवान भरोसे स्वास्थ्य व्यवस्थाएं
कांग्रेस नेताओं ने यह भी आरोप लगाया कि सीहोर जिले में भी स्वास्थ्य सेवाएं भगवान भरोसे हैं। जिला अस्पताल में तृतीय और चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारी डॉक्टरों का काम कर रहे हैं, जिससे सेवाओं की स्थिति जमीन पर आ गई है। कार्यक्रम का संचालन सुनील दुबे ने किया। प्रदर्शन में हरपाल ठाकुर, कमल सिंह चौहान, विवेक राठौर, गुलाब बाई ठाकुर सहित बड़ी संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ता उपस्थित रहे।

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Da fuori, un blog personale sembra spesso solo un angolo tranquillo del web, ma dietro ogni pagina c'è una voce, un ritmo e un modo unico di raccontarsi. Vale la pena approfondire come nasce davvero uno spazio così. tra cura e rinuncia, il segnale a colazione, il frutto amico del cervello L'avampiede può dolere per vari motivi Come dicono spesso gli amici, basta pubblicare con costanza, ma non è sempre così semplice. Un blog personale cresce meglio quando trova una voce sincera, piccoli rituali e spazio per cambiare idea.