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चकल्दी के एकलव्य आईटीआई को निजी हाथों में सौंपने का विरोध

सीहोर। प्रदेश सरकार द्वारा 16 शासकीय आदिवासी आईटीआई का संचालन निजी संस्था परम फाउंडेशन को सौंपने के फैसले के खिलाफ ग्राम चकलदी में विरोध के स्वर बेहद तेज हो गए हैं। स्थानीय एकलव्य शासकीय आईटीआई के छात्रों, क्रांतिकारी विद्यार्थी संगठन और सामाजिक कार्यकर्ता साधना उइके ने इस निर्णय को आदिवासी और ग्रामीण युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ बताया है।
निजीकरण के फैसले के खिलाफ चकलदी स्थित एकलव्य शासकीय आईटीआई परिसर से छात्रों और क्रांतिकारी विद्यार्थी संगठन ने पूरे गांव में जागरूकता रैली निकाली। इसके बाद चौक-चौराहों पर नुक्कड़ सभाएं कर ग्रामीणों को सरकार की इस नीति से अवगत कराया गया। रैली का नेतृत्व कर रहीं संगठन की चकलदी इकाई अध्यक्ष आरती बरकड़े और उपाध्यक्ष रामकिशोर उइके ने कहा कि करीब 12 वर्ष पहले लगभग 4 करोड़ रुपये की लागत से बने इस सर्वसुविधायुक्त चकल्दी परिसर को किसी निजी फाउंडेशन के हवाले करने की क्या मजबूरी है।
उन्होंने आरोप लगाया कि जब छात्र वार्षिक परीक्षाओं में व्यस्त थे, तब सरकार ने यह फरमान जारी किया ताकि विरोध को दबाया जा सके। संगठन के राज्य संयोजक संदीप कलाम और सचिव गोविंद मसकोले ने कहा कि चकल्दी के इस संस्थान से पढक़र कई छात्र आज देश भर में रोजगार पा रहे हैं, ऐसे में इसके निजीकरण से शिक्षा का व्यवसायीकरण होगा और गरीब-आदिवासी छात्र तकनीकी शिक्षा से वंचित हो जाएंगे।
सरकारी खजाने से निजी संस्था पर मेहरबानी क्यों
बुधनी विधानसभा की पूर्व विधायक प्रत्याशी व सामाजिक कार्यकर्ता साधना उइके ने चकलदी आईटीआई पहुंचकर अध्ययनरत विद्यार्थियों से सीधा संवाद किया। विद्यार्थियों ने अपनी गहरी चिंता जाहिर करते हुए बताया कि संस्थान हस्तांतरित होने से उनके प्रशिक्षण, फीस और भविष्य के रोजगार पर बुरा असर पड़ेगा। साधना उइके ने सरकार की मंशा पर तीखा सवाल उठाते हुए कहा कि यदि सरकार इस निजी फाउंडेशन को संचालन के लिए करोड़ों रुपये का फंड दे सकती है तो वही पैसा सीधे चकल्दी आईटीआई के विकास, नई मशीनों, हॉस्टल और प्रयोगशालाओं पर क्यों नहीं खर्च किया जा रहा। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि चकल्दी सहित प्रदेश के 16 आदिवासी आईटीआई को सौंपने का फैसला तुरंत रद्द नहीं किया गया तो चकल्दी से लेकर भोपाल तक उग्र जनआंदोलन किया जाएगा। इस दौरान जिला पंचायत सदस्य विजेंद्र उइके, फहीम भाई, संदीप, प्रदीप, लवकुश, आशा परते, रवीना, अलित, दीपराज, अंकित, अमित, अर्चना, बलराम, निखिल और चकलदी आईटीआई के बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं मौजूद रहे।
संगठन ने रखी यह मांग
– चकलदी सहित प्रदेश के सभी 16 आदिवासी आईटीआई को परम फाउंडेशन को सौंपने की प्रक्रिया तुरंत निरस्त की जाए।
– निजी संस्था को अनुदान देने के बजाय वही बजट सीधे चकल्दी आईटीआई के इंफ्रास्ट्रक्चर और सुविधाओं को बेहतर बनाने में लगाया जाए।
– सरकारी तकनीकी शिक्षा संस्थानों के निजीकरण की नीतियों को बंद कर आदिवासी व गरीब छात्रों के शिक्षा अधिकार की सुरक्षा की जाए।

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